Maharashtra Politics: कपिल सिब्बल और मनीष तिवारी ने कांग्रेस की बीएमसी चुनाव में दुर्दशा की पोल खोल दी है. सिब्बल के अनुसार, 2012 से कांग्रेस का गिरता ग्राफ और बीजेपी की सहयोगियों को खत्म करने वाली रणनीति विपक्ष के लिए खतरे की घंटी है. तिवारी ने भी माना कि तोड़-फोड़ की राजनीति के बावजूद बहुमत का आंकड़ा कमजोर है.
मुंबई महानगरपालिका के चुनावी नतीजों ने विपक्षी खेमे में एक ऐसा सन्नाटा पसरा दिया है जिसमें हार की गूंज साफ सुनाई दे रही है. जिस बीएमसी का बजट देश के कई राज्यों से बड़ा हो वहां कांग्रेस का लगातार गिरता ग्राफ केवल एक हार नहीं बल्कि वजूद पर मंडराता संकट है.
क्या होता अगर कांग्रेस ने कपिल सिब्बल और मनीष तिवारी जैसे अनुभवी रणनीतिकारों की नार्थ और साउथ पोल वाली नसीहत समय रहते मान ली होती? कांग्रेस ने सबसे पहले बीएमसी चुनाव से अकेले मैदान में उतरने की बात कही. जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा. उधर, सिब्बल-तिवारी ने अपने विश्लेषण से यह साफ कर दिया कि देश के हर कोने में जो-जो दल कांग्रेस के साथ गया, वो धीरे-धीरे खत्म हो गया. मतलब साफ है कि कांग्रेस इन दलों के साथ लेकर चलने में विफल रही. जिसका फायदा बीजेपी ने भरपूर उठाया. कांग्रेस का गिरता ग्राफ और बीजेपी की ‘खत्म’ करने वाली रणनीति! राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने बीएमसी नतीजों को राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक बड़ा संकेत बताया है. उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस का ग्राफ साल 2012 से लगातार गिर रहा है जबकि बीजेपी 2012 में 31 से बढ़कर 2026 में 89 सीटों तक पहुंच गई. सिब्बल ने आगाह किया कि बीजेपी की रणनीति अपने सहयोगियों को ही मार्जिनलाइज यानी किनारे लगाने की है. उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि जहां बीजेपी को कांग्रेस से सीधी लड़ाई दिखती है , वहां वे समझौता नहीं करते लेकिन छोटी पार्टियों के साथ मिलकर वे अंततः उन्हीं का वजूद खत्म कर देते हैं. सिब्बल के मुताबिक, विपक्षी दलों को यह तय करना होगा कि वे किस ‘ध्रुव’ की राजनीति करना चाहते हैं क्योंकि बीजेपी के साथ जाने का मतलब अपना राजनीतिक भविष्य खत्म करना है. मनीष तिवारी का विश्लेषण उधर, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बीएमसी नतीजों को बीजेपी की ‘तोड़-फोड़’ वाली राजनीति पर जनता का जवाब बताया है. तिवारी का तर्क है कि बीजेपी और उनके साथ आए शिवसेना के गुट को मिलाकर जो सीटें मिली हैं, वह बहुमत के आंकड़े से बहुत ज्यादा ऊपर नहीं हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि 50% से ज्यादा सीटें उन पार्टियों को मिली हैं जो बीजेपी के खिलाफ थीं और खास तौर पर उस तरीके के खिलाफ थीं जिस तरह से शिवसेना को तोड़ा गया. मनीष तिवारी के अनुसार जो लोग बीजेपी के साथ गए उनका हश्र पूरे देश के सामने है. उन्होंने साफ किया कि मुंबई की जनता ने उन लोगों को खारिज किया है जिन्होंने अवसरवादी राजनीति के लिए अपने मूल विचारों से समझौता किया.
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