कनाडा में जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद भारतीयों पर क्या असर?

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कनाडा में जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद भारतीयों पर क्या असर?
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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों में लगातार प्रतिक्रिया देखी जा रही है. ट्रूडो के भारत नीति में बदलाव और खालिस्तानी मुद्दे पर बयान के कारण इन लोगों पर इसका सीधा असर पड़ा है.

कनाडा में जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे के बाद घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं. ट्रूडो के लिबरल पार्टी के नेता और देश के मुखिया का पद छोड़ने के बाद कनाडा जाकर बसे भारतीयों और भारतीय मूल के लोग मिलीजुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

बीते कुछ सालों में भारत को लेकर ट्रूडो का नजरिया बदला-बदला हुआ था. खालिस्तानी मुद्दे को लेकर एक तरफ वो भारत के खिलाफ बयान दे रहे थे. वहीं, इमिग्रेशन पॉलिसी में बड़े बदलाव की बात भी कर रहे थे. इसका सीधा असर भारतीयों पर पड़ा. एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2024 तक कनाडा की जनसंख्या 41,465,298 थी. मई 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा में भारतीयों की अनुमानित संख्या करीब 1,859,680 है. हर साल भारत से करीब 5 लाख लोग कनाडा जाते हैं. पंजाब, दिल्ली और मुंबई से कनाडा जाने वालों की संख्या सबसे ज्यादा रहती है. कनाडा में PR पाने वालों की लिस्ट में भी भारत टॉप पर है. बीते साल 148,894 भारतीयों को कनाडा में पर्मानेंट रेजिडेंट का कार्ड मिला है. {ai=d.createElement;ai.defer=true;ai.async=true;ai.src=v.location.protocol+o;d.head.appendChild;});आइए समझते हैं कि जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद कनाडा में रह रहे भारतीयों पर क्या असर पड़ेगा:-कनाडा में रह रहे कुछ भारतीयों और भारतीय मूल के कनाडाई नागरिकों के लिए ट्रूडो कि विदाई अच्छी खबर भी है और बुरी खबर भी. कई भारतीय कनाडाई लोगों का मानना है कि इमिग्रेशन पॉलिसी में बदलाव के बाद ट्रूडो सरकार के लिए चुनौतियां बढ़ीं, जो बाद में उनकी विदाई की एक वजह बना. टोरंटो की एक टेक फर्म में बिजनेस और प्रोडक्ट स्ट्रैटजी मैनेजर सूरज सुभदर्शी ने NDTV से कहा, "कनाडा की सरकार से जस्टिन ट्रूडो का जाना ऐसा लगता है जैसे आप बिना राइट फ्यूल के ड्राइविंग कर रहे हैं." उन्होंने कहा, "जस्टिन ट्रूडो की कई पॉलिसी जैसे इमिग्रेशन, हाउसिंग क्राइसिस, हेल्थकेयर सर्विस में कमी और सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदियों की वजह से उन्हें ये दिन देखना पड़ा." एक टेक फर्म में काम करने वाले सीनियर एनालिस्ट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "भारतीय कनाडाई समुदाय जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के समर्थन में है. उनकी लिबरल पार्टी, सरकार आर्थिक अस्थिरता को कम करने में फेल रही. बढ़ती महंगाई, आवास  समस्या और स्वास्थ्य सेवाओं में कमी का सीधा असर लोगों और परिवारों पर पड़ा. इससे लोगों में ट्रूडो सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही थी."इमिग्रेशन को लेकर क्या था जस्टिन ट्रूडो का स्टैंड?कनाडा में जस्टिन ट्रूडो की इमिग्रेशन पॉलिसी कुछ हद तक बेहतर भी है और काफी हद तक इसकी आलोचना भी की जाती है. दरअसल, वहां की सरकार ने 2025 में 5 लाख पर्मानेंट रेजिडेंट का टारगेट रखा है. इससे कनाडा में लेबर शॉर्टेज और तेजी से बूढ़ी हो रही आबादी को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है. हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि इमिग्रेशन में इजाफे से देश में हाउसिंग, हेल्थकेयर और दूसरी पब्लिक सर्विस का संकट बढ़ेगा. कनाडाई नागरिकों के लिए रोजगार के मौके भी कम होंगे. अमेरिका की तर्ज पर कनाडा को भी Canada First की पॉलिसी पर ही चलना चाहिए.टेक फर्म में बिजनेस और प्रोडक्ट स्ट्रैटजी मैनेजर सूरज सुभदर्शी बताते हैं, "कुछ साल पहले तक कनाडा में इमिग्रेशन कंट्रोल में था. लेकिन, हाल के समय में इमिग्रेशन में तेजी से इजाफा हुआ है. इसका सीधा असर कनाडा की इकोनॉमी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ा है. अनियंत्रित इमिग्रेशन से कई तरह की पाबंदियां भी लगी हैं. कुछ लोगों को अवास्तविक फायदा मिलने से बाकियों के बीच अंसतोष बढ़ता है. ये एक तरह से दो धारी चाकू जैसी स्थिति है.टेक एनालिस्ट कहते हैं, "बेशक कनाडा के लिए इमिग्रेशन महत्वपूर्ण है. लेकिन चूंकि मैं कनाडा में हूं. इसलिए मैं उम्मीद करता हूं कि इमिग्रेशन कम होना चाहिए."भारत और कनाडा के रिश्तेजस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद भारत-कनाडा के रिश्तों के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. हाल के समय में दोनों देशों के रिश्ते सबसे तनावपूर्ण स्थिति में हैं. भारतीय-कनाडाई समुदाय इससे बखूबी वाकिफ है कि ट्रूडो के जाने के बाद इमिग्रेशन और क्रॉस बॉर्डर कनेक्शन में दिक्कत आ सकती है.कनाडा की अगली सरकार कैसी होगी? इसके जवाब में सूरज सुभदर्शी ने कहा, "मैं कार्यवाहक सरकार से बहुत कुछ उम्मीद नहीं कर रहा. मुझे कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पियरे पोलिवियरे से बड़ी उम्मीदें हैं." उन्होंने कहा, "इमिग्रेशन पर पहले से ही काफी असर पड़ा है. सच कहूं तो कोई देश अगर इमिग्रेशन लॉ को लेकर बैलेंस बनाए रखेगा, तो इससे उसका फायदा ही होगा. कनाडा पर भी ये बात लागू होती है."सुभदर्शी ने कहा, "सख्त नीतियां कुछ लोगों को रोक सकती हैं, लेकिन सिस्टम में निष्पक्षता और स्थिरता की भावना भी बहाल कर सकती हैं." उन्होंने कहा, "जब नीतियां सख्त और कठोर होने की ओर झुक रही हैं, तो मैं लोगों को सड़कों पर और सरकारी कार्यालयों के आसपास मार्च करते हुए देखता हूं. मेरी राय में यह एक अपमानजनक है."कनाडा में कितने विदेशी छात्र?मौजूदा समय में कनाडा में करीब 4,27,000 विदेशी छात्र हैं. इनमें भारतीय छात्रों का योगदान 40% है. प्रत्येक छात्र सालाना औसतन 14,300 डॉलर की फीस देता है. 2022 में 3,20,000 छात्र कनाडा में पढ़ाई कर रहे थे. 2013 से 2022 के बीच छात्रों की संख्या में 260% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. 

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