कोल्हापुर की मोनिका मोहिते ने अपने बेटे की सेहत को ध्यान में रखते हुए ऑर्गेनिक खेती की शुरुआत की थी, जो बाद में एक सफल बिजनेस में बदल गई। आज वे इससे सालाना 40 लाख रुपये कमा रही हैं। उनकी सफलता की कहानी और ऑर्गेनिक खेती के बारे में विस्तार से जानें।
नई दिल्ली। बीते कुछ सालों में भारत में ऑर्गेनिक खेती का चलन काफी बढ़ा है। हेल्दी खाने के साथ-साथ ऑर्गेनिक फार्मिंग एक तगड़े बिजनेस आइडिया के तौर पर भी उभरा है। कई लोग ऑर्गेनिक फार्मिंग से मोटी कमाई कर रहे हैं, जिनमें कोल्हापुर की मोनिका मोहिते भी शामिल हैं। खास बात ये है कि मोनिका ने अपने बेटे को हेल्दी खाना देने के लिए ऑर्गेनिक फार्मिंग शुरू की थी। मगर धीरे-धीरे ये उनका बिजनेस बन गया। आज वे इससे सालाना 40 लाख रुपये कमा रही हैं। आइए जानते हैं कैसे मिली उन्हें कामयाबी। क्यों की ऑर्गेनिक खेती की शुरुआत? आज खेती-बाड़ी में रासायनिक चीजों का ही बोलबाला है। ऐसे में मोनिका का ऑर्गेनिक खेती का सफर बहुत सादा और दिल से जुड़ी बात से शुरू हुआ, जो था एक माँ की अपने बेटे की सेहत को लेकर चिंता। उनका बेटा ध्रुव प्रोफेशनल मोटर रेसिंग कर रहा था, जो एक ऐसा मुश्किल खेल है, जिसमें बहुत ज्यादा शारीरिक सहनशक्ति की जरूरत होती है।एक डाइटीशियन ने उन्हें बताया कि कमर्शियल एनर्जी फूड में पोषक तत्वों की कमी होती है। पौषक तत्वों वाले खाने की खोज में मोनिका को बहुत कम ऑप्शन मिले। फिर खुद शुरू की खेती जो उपलब्ध था, उसी से संतोष करने के बजाय, मोनिका ने उन खाद्य पदार्थों को खुद बनाने का फैसला किया, जो उनके बेटे के लिए जरूरी थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोनिका कहती हैं कि जैविक खेती को ठीक से समझने में वर्कशॉप, फील्ड विजिट और शुरुआती गलतियों के साथ-साथ उन्हें कामयाब होने में कुछ साल लग गए। आज कितनी है कमाई? मोनिका ने जो एक छोटे से प्रयोग के रूप में शुरू किया था, वह जल्द ही एक बड़े कारोबार में तब्दील हो गया। समय के साथ, मोनिका ने इस आइडिया को 40 एकड़ में फैले एक पूर्ण-विकसित ऑर्गेनिक खेती के वेंचर में बदल दिया, जिससे अब वे सालाना 40 लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं।वहीं ध्रुव की यात्रा भी उन्हें सफलता तक ले गई। 2019 में, वह इंडियन टूरिंग कार चैंपियनशिप के सबसे कम उम्र के विजेता बने और फिर आगे चलकर तीन बार के राष्ट्रीय चैंपियन बने। कभी पड़ोसियों ने उड़ाया था मजाक? 2010 में, उन्होंने नेशनल हाईवे 4 के पास वड़गाँव गाँव में 'पारखी ऑर्गेनिक फार्म्स' की स्थापना की, जो एक ऐसा उद्यम है जो धीरे-धीरे स्वच्छ और टिकाऊ खेती के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाने लगा। अपने 40 एकड़ के फार्म में, वे अधिक प्रोटीन वाला सोया आटा, गन्ने से बना गुड़, आम और चीकू का गूदा, चावल, ज्वार, दालें, ताजी सब्जियाँ उगाती हैं।इतना ही नहीं वे गाय के गोबर से बनी धूप बत्ति भी बनाती हैं, जो एक ऐसा उत्पाद जिसका पड़ोसियों ने कभी मजाक उड़ाया था, लेकिन अब शहरी ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गया है। सब कुछ यूज होता है नेचुरल अपने पारखी फार्म में, मोनिका सिंथेटिक चीजों का इस्तेमाल नहीं करतीं, बल्कि देसी खिलारी गायों से मिलने वाली चीजों जैसे गोमूत्र और गोमय का इस्तेमाल करके नैचुरल खाद, स्प्रे और कीड़े भगाने वाली दवाएँ बनाती हैं।मोनिका के अनुसार गाय के गोबर से ब्रिकेट और धूप की अगरबत्तियाँ बनाई जाती हैं, जो खरीदारों के बीच काफी लोकप्रिय हो गई हैं। उनके पास 12 गायें हैं। 12 कर्मचारियों की एक टीम उनके फार्म पर कटाई, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का काम संभालती है। सोशल मीडिया के जरिए फैला कारोबार कारोबार को फैलाने में सोशल मीडिया पर मोनिका की मौजूदगी एक जबरदस्त जरिया बन गई। फसल कटाई, खेती-बाड़ी की जिंदगी, मवेशियों की देखभाल और उत्पादों की प्रोसेसिंग से जुड़े पोस्ट के जरिए, उन्होंने लोगों को अपनी ओर खींचा। ये भी पढ़ें - क्यों दिवालिया हुई एजुकेशन सेक्टर की 'स्टार'? IIM के पूर्व छात्र की कंपनी ऐसे फंसी कर्ज के जाल में; ₹1 पर आया ₹960 वाला शेयर.
नई दिल्ली। बीते कुछ सालों में भारत में ऑर्गेनिक खेती का चलन काफी बढ़ा है। हेल्दी खाने के साथ-साथ ऑर्गेनिक फार्मिंग एक तगड़े बिजनेस आइडिया के तौर पर भी उभरा है। कई लोग ऑर्गेनिक फार्मिंग से मोटी कमाई कर रहे हैं, जिनमें कोल्हापुर की मोनिका मोहिते भी शामिल हैं। खास बात ये है कि मोनिका ने अपने बेटे को हेल्दी खाना देने के लिए ऑर्गेनिक फार्मिंग शुरू की थी। मगर धीरे-धीरे ये उनका बिजनेस बन गया। आज वे इससे सालाना 40 लाख रुपये कमा रही हैं। आइए जानते हैं कैसे मिली उन्हें कामयाबी। क्यों की ऑर्गेनिक खेती की शुरुआत? आज खेती-बाड़ी में रासायनिक चीजों का ही बोलबाला है। ऐसे में मोनिका का ऑर्गेनिक खेती का सफर बहुत सादा और दिल से जुड़ी बात से शुरू हुआ, जो था एक माँ की अपने बेटे की सेहत को लेकर चिंता। उनका बेटा ध्रुव प्रोफेशनल मोटर रेसिंग कर रहा था, जो एक ऐसा मुश्किल खेल है, जिसमें बहुत ज्यादा शारीरिक सहनशक्ति की जरूरत होती है।एक डाइटीशियन ने उन्हें बताया कि कमर्शियल एनर्जी फूड में पोषक तत्वों की कमी होती है। पौषक तत्वों वाले खाने की खोज में मोनिका को बहुत कम ऑप्शन मिले। फिर खुद शुरू की खेती जो उपलब्ध था, उसी से संतोष करने के बजाय, मोनिका ने उन खाद्य पदार्थों को खुद बनाने का फैसला किया, जो उनके बेटे के लिए जरूरी थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोनिका कहती हैं कि जैविक खेती को ठीक से समझने में वर्कशॉप, फील्ड विजिट और शुरुआती गलतियों के साथ-साथ उन्हें कामयाब होने में कुछ साल लग गए। आज कितनी है कमाई? मोनिका ने जो एक छोटे से प्रयोग के रूप में शुरू किया था, वह जल्द ही एक बड़े कारोबार में तब्दील हो गया। समय के साथ, मोनिका ने इस आइडिया को 40 एकड़ में फैले एक पूर्ण-विकसित ऑर्गेनिक खेती के वेंचर में बदल दिया, जिससे अब वे सालाना 40 लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं।वहीं ध्रुव की यात्रा भी उन्हें सफलता तक ले गई। 2019 में, वह इंडियन टूरिंग कार चैंपियनशिप के सबसे कम उम्र के विजेता बने और फिर आगे चलकर तीन बार के राष्ट्रीय चैंपियन बने। कभी पड़ोसियों ने उड़ाया था मजाक? 2010 में, उन्होंने नेशनल हाईवे 4 के पास वड़गाँव गाँव में 'पारखी ऑर्गेनिक फार्म्स' की स्थापना की, जो एक ऐसा उद्यम है जो धीरे-धीरे स्वच्छ और टिकाऊ खेती के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाने लगा। अपने 40 एकड़ के फार्म में, वे अधिक प्रोटीन वाला सोया आटा, गन्ने से बना गुड़, आम और चीकू का गूदा, चावल, ज्वार, दालें, ताजी सब्जियाँ उगाती हैं।इतना ही नहीं वे गाय के गोबर से बनी धूप बत्ति भी बनाती हैं, जो एक ऐसा उत्पाद जिसका पड़ोसियों ने कभी मजाक उड़ाया था, लेकिन अब शहरी ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गया है। सब कुछ यूज होता है नेचुरल अपने पारखी फार्म में, मोनिका सिंथेटिक चीजों का इस्तेमाल नहीं करतीं, बल्कि देसी खिलारी गायों से मिलने वाली चीजों जैसे गोमूत्र और गोमय का इस्तेमाल करके नैचुरल खाद, स्प्रे और कीड़े भगाने वाली दवाएँ बनाती हैं।मोनिका के अनुसार गाय के गोबर से ब्रिकेट और धूप की अगरबत्तियाँ बनाई जाती हैं, जो खरीदारों के बीच काफी लोकप्रिय हो गई हैं। उनके पास 12 गायें हैं। 12 कर्मचारियों की एक टीम उनके फार्म पर कटाई, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का काम संभालती है। सोशल मीडिया के जरिए फैला कारोबार कारोबार को फैलाने में सोशल मीडिया पर मोनिका की मौजूदगी एक जबरदस्त जरिया बन गई। फसल कटाई, खेती-बाड़ी की जिंदगी, मवेशियों की देखभाल और उत्पादों की प्रोसेसिंग से जुड़े पोस्ट के जरिए, उन्होंने लोगों को अपनी ओर खींचा। ये भी पढ़ें - क्यों दिवालिया हुई एजुकेशन सेक्टर की 'स्टार'? IIM के पूर्व छात्र की कंपनी ऐसे फंसी कर्ज के जाल में; ₹1 पर आया ₹960 वाला शेयर
ऑर्गेनिक खेती सफलता की कहानी मोनिका मोहिते कोल्हापुर कृषि व्यवसाय
United States Latest News, United States Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
गौतमबुद्ध नगर में गहराता भूजल संकट, अवैध प्लांट सुखा रहे धरती की कोखगौतमबुद्ध नगर में बढ़ती आबादी और औद्योगिक विकास से भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। 20 साल में पानी 40 फीट से 140 फीट नीचे चला गया है।
Read more »
दुबई के रियल एस्टेट सेल में 40% की गिरावट, क्या भारत बनेगा नया 'सेफ हेवन'एक महीने पहले दुबई का रियल एस्टेट मार्केट विदेशी निवेशकों के लिए पसंदीदा जगह हुआ करता था, लेकिन मिडिल ईस्ट में बढते तनाव की वजह से हालात बदल गए हैं और अब निवेशक वहां पैसे लगाने से कतराने लगे हैं.
Read more »
क्या है निवेश मित्र 3.0? एक क्लिक पर मिलेंगी 200 सेवाएं, निवेशकों को मिलेगी बड़ी राहत, CM योगी ने किया लॉन्चCM Yogi Launch Nivesh Mitra 3.0: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निवेश मित्र 3.0 पोर्टल लॉन्च किया, जिसमें 40 से अधिक विभागों की 200 सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।
Read more »
पॉल्यूशन, लाइसेंस न इंश्योरेंस; गुरुग्राम में बुलेट का काटा 40 हजार रुपये का चालानगुरुग्राम में यातायात पुलिस ने एक बुलेट बाइक का 40,000 रुपये का चालान किया। डूंडाहेड़ा बॉर्डर पर जांच के दौरान बाइक चालक के पास प्रदूषण प्रमाण पत्र, बीमा और ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।
Read more »
अखिलेश 40 हजार नहीं, 40 लाख रुपये दें, फिर भी कोई महिला नहीं दबाएगी साइकिल पर बटन : केशवउप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मीरजापुर में मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि भाजपा 2027 में बड़े बहुमत से सरकार बनाएगी, जबकि सपा सैफई चली जाएगी।
Read more »
बंगाल चुनाव: जंगल महल की 40 सीटों का सियासी गणित, जो तय कर सकती हैं जीत-हारपश्चिम बंगाल के जंगल महल की 40 सीटें इस बार चुनावी नतीजों की दिशा तय कर सकती हैं. आदिवासी और कुर्मी समुदाय के समीकरण के बीच बीजेपी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में है, जबकि टीएमसी अपने मजबूत जनाधार को बनाए रखने में जुटी है.
Read more »
