करनाल में एक बच्चे को ऑनलाइन गेमिंग की लत लग गई, जिसके चलते उसने अपने पिता पर चाकू से हमला करने की कोशिश की। मनोचिकित्सक की कमी और डोपामाइन के प्रभाव ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया।
यह घटना सिर्फ एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गहरी चिंता का विषय है। यह हमें बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य और ऑनलाइन गेमिंग की लत के गंभीर परिणामों के प्रति सचेत करता है। नागरिक अस्पताल के मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिसर, डिपार्टमेंट ऑफ साइकेट्री, डॉ.
विनय गुप्ता ने हाल ही में एक मामले का खुलासा किया, जिसमें करनाल के बल्ला गांव से एक अभिभावक अपने बेटे को इलाज के लिए लेकर आए थे। बच्चा एक ऐसे ऑनलाइन गेम का आदी हो चुका था जिसमें उसे हिंसक कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाता था। खेल में आगे बढ़ने के लिए उसे ऐसे कार्यों को पूरा करना पड़ता था जो उसकी वास्तविक दुनिया में हिंसा को बढ़ावा देते थे। गेम के जुनून में बच्चा इस कदर डूब गया था कि उसे अपने ही लोग दुश्मन नजर आने लगे थे। गेम में उसे एक ऐसा कार्य दिया गया था जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। बच्चे को रात के समय अपने पिता की गर्दन पर चाकू रखने का टास्क मिला था। उसने इस कार्य को अंजाम देने की कोशिश भी की। आधी रात को उठकर उसने अपने पिता की गर्दन पर चाकू रख दिया। गनीमत रही कि उसने वार नहीं किया, वरना एक भयानक हादसा हो सकता था। काउंसलिंग के दौरान यह भी पता चला कि बच्चे के माता-पिता के बीच अक्सर घरेलू हिंसा होती थी। इसका बच्चे की मानसिक स्थिति पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा। लगातार काउंसलिंग के बाद बच्चे के व्यवहार में कुछ सुधार जरूर देखा गया, लेकिन यह स्थिति की गंभीरता को कम नहीं करता। ऐसे मामले बच्चों की मानसिक स्थिति पर ऑनलाइन गेमिंग के हानिकारक प्रभावों को उजागर करते हैं और माता-पिता और समाज को बच्चों की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। डोपामाइन, एक न्यूरोट्रांसमीटर है जिसे फील-गुड या आनंद हार्मोन भी कहा जाता है। यह प्रेरणा, खुशी, ध्यान, स्मृति और शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है। ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के दिमाग में डोपामाइन के स्तर को बढ़ा देता है, जिससे उन्हें सही और गलत के बीच का फर्क समझ में नहीं आता।\जिले में इस तरह के अन्य मामले भी सामने आए हैं जिनमें बच्चे गेम में हथियार खरीदने या अपने करैक्टर को अपग्रेड करने के लिए घर में चोरी जैसी वारदातों को अंजाम देने लगे। काउंसलर्स का कहना है कि गेम के दौरान मिलने वाले वर्चुअल रिवार्ड्स बच्चों के दिमाग में डोपामाइन का स्तर बढ़ा देते हैं, जिससे उन्हें सही और गलत का फर्क समझ में नहीं आता। यह एक गंभीर समस्या है जो बच्चों को अपराध की ओर धकेल सकती है। बच्चों को ऐसे खेलों से दूर रखने के लिए अभिभावकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्हें बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे केवल उम्र-उपयुक्त सामग्री ही देखें। बच्चों के साथ खुलकर बात करें और उनकी भावनाओं को समझें। यदि बच्चा किसी भी प्रकार की मानसिक परेशानी से जूझ रहा है, तो तुरंत पेशेवर मदद लें। बच्चों को हिंसा से बचाने के लिए माता-पिता, शिक्षकों और समाज को एक साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि बच्चों को एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिले जहां वे बिना किसी डर के विकसित हो सकें। समय रहते हस्तक्षेप न किया जाए, तो ऐसे बच्चे गंभीर अपराध या आत्मघाती कदम भी उठा सकते हैं। यह समस्या न केवल बच्चों के भविष्य को खतरे में डालती है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी इस समस्या को बढ़ा रही है।\नागरिक अस्पताल में एक साल से कोई स्थायी मनोचिकित्सक तैनात नहीं है। वर्तमान में, पूरा उपचार काउंसलर्स के भरोसे चल रहा है। यह एक गंभीर स्थिति है क्योंकि काउंसलर्स उन सभी मामलों को संभालने में सक्षम नहीं हो सकते हैं जिनमें विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। गंभीर मानसिक विकारों से पीड़ित मरीजों को दवाइयों या विशेष इलाज के लिए रोहतक पीजीआई अथवा अन्य बड़े चिकित्सा केंद्रों में रेफर करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग की यह कमी उन परिवारों पर भारी पड़ रही है जो निजी इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। यह उन गरीब और वंचित परिवारों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है जिनके पास इलाज के लिए संसाधन नहीं हैं। सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द नागरिक अस्पताल में एक स्थायी मनोचिकित्सक की नियुक्ति करे ताकि मरीजों को समय पर उचित इलाज मिल सके। इसके अलावा, सरकार को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए भी कदम उठाने चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हम सभी को मिलकर काम करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमारे बच्चों और समाज के सभी सदस्यों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता और समर्थन मिल सके। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर जागरूकता बढ़ाना और लोगों को समय पर मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं सभी के लिए सुलभ हों, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कुछ भी हो
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