Rajkot Fire News: गुजरात के राजकोट में टीआरपी गेम जोन अग्निकांड में एक परिवार ने पांच सदस्यों को खोया है। जडेजा परिवार वीकेंड पर मस्ती के लिए बाहर गया था लेकिन यह अब जिंदगीभर न भुल पाने वाले दर्द में बदल गया है। एक नवविवाहित जोड़ा भी जलकर राख हो गया।
राजकोट : प्रदीप सिंह चौहान राजकोट सिविल अस्पताल के बाहर लापता लोगों के कई चिंतित रिश्तेदारों के बीच खड़े थे। आंखों में आंसू, सीने में दर्द और चेहरे पर मायूसी लिए प्रदीप बदहवास हो चुके थे। भीषण गर्मी में वह बिना खाना- पानी के अपने प्रियजनों की तलाश में जुटे थे। उनका दिल बैठा जा रहा है। प्रदीप के परिवार से 5 सदस्य उस समय टीआरपी गेम जोन में मौजूद थे, जब वहां भीषण आग लगी। उनका 15 वर्षीय बेटा, उनका साला और उनकी बहन का परिवार वहां मौजूद था। प्रदीप चौहान ने कहा, 'मेरे परिवार के दो सदस्य बच्चों को बचाने के लिए दूसरी मंजिल पर गए, लेकिन वे बाहर नहीं आ सके।' मृतकों की संख्या 33 हो गई है। बुरी तरह जले शवों की पहचान नहीं हो पाई, जिसके लिए डीएनए परीक्षण की आवश्यकता है और इसमें समय लगेगा।अधिकारियों ने आग लगने के बाद लापता लोगों की सूची तैयार की है। प्रदीप ने बताया कि उनके परिवार से लापता लोगों में एक नवविवाहित कपल विवेक , और खुशाली दुसारा हैं। उनकी भाभी तिशा वहां मौजूद थीं।गिर सोमनाथ से आया परिवारगिर सोमनाथ जिले में रहने वाले इस परिवार ने रात भर बिना सोए गुजारी, क्योंकि वे फोन पर जोड़े से संपर्क नहीं कर पाए। वे रविवार को राजकोट पहुंचे। विवेक और खुशाली की शादी दो महीने पहले ही हुई थी। शादी के बाद दोनों खुश थे। एक-दूसरे के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए घूमने निकले थे और वीकेंड पर बाहर गए थे। रेक्स्यू के काम में जुटा, गवाईं जानसुरपाल सिंह जडेजा अपने दो दोस्तों के साथ खेल क्षेत्र में गए थे, लेकिन बाद में उन्हें लापता घोषित कर दिया गया। उनके पिता पथुभा ने कहा, 'मेरा बेटा बचाव कार्य में शामिल था। वह लोगों को बचा रहा था। मैं उसके संपर्क में था। लेकिन कुछ समय बाद हमारा संपर्क टूट गया।' 22 वर्षीय कल्पेश बागदा पिछले दो सालों से गेम जोन में काम कर रहे थे। अब उन्हें मृत मान लिया गया है। बागदा अपने परिवार के लिए उम्मीद की किरण थे। उनके चाचा मनसुखभाई ने दुख जताते हुए कहा, 'कल्पेश का परिवार उनकी नई नौकरी से अच्छी ज़िंदगी की उम्मीद कर रहा था। लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया है।'यूपी के युवक की भी मौतउत्तर प्रदेश से 20 दिन पहले ही गेम जोन में काम करने आया 17 वर्षीय मोनू गौड़ भी लापता सूची में हैं। उसकी मौसी संगीता ने कहा कि अगर हमें पता होता कि यह काम उसकी जान ले लेगा तो मैं उसे यहां नहीं बुलाती। दक्ष, अपने 10 वर्षीय चचेरे भाई के साथ गेम जोन में गया था, दक्ष की भी दर्दनाक मौत हो गई। उसने बताया, 'आग आपातकालीन निकास द्वार के पास लगी और इससे एग्जिट गेट ब्लॉक हो गया। यह क्षेत्र टिन की चादर से ढका हुआ था। मैंने बाहर निकलने के लिए इसे लात मारकर तोड़ दिया। कुछ लोग पहली मंजिल से कूद गए। जो कूद नहीं पाए, वे मर गए।'ऐसे जडेजा परिवार ने अपनों को खोयादक्ष के भाई के हाथ और माथे पर चोटें आईं और उसका इलाज चल रहा है। वीकेंड की सैर दुख की घड़ी में तब्दील हो गई। जडेजा परिवार भी इस गेम जोन में मौजूद था, जब इसमें भीषण आग लग गई। विरेंद्र सिंह जडेजा की बेटी देविकाबा जडेजा ने कहा, 'मेरे पिता आग लगने के बाद मेरे भाई और तीन अन्य रिश्तेदारों को बचाने के लिए गेम जोन की ऊपरी मंजिल पर पहुंचने के बाद लापता हो गए।'देविकाबा ने कहा कि जडेजा परिवार के जो 5 सदस्य लापता हैं, उन्हें मृत मान लिया गया है, जिनमें से तीन 10-15 साल की उम्र के बच्चे हैं। उन्होंने कहा, 'जब आग लगी तो हम रेस्तरां में बैठे थे। मेरे पिता और मामा दौड़कर वहां पहुंचे, जहां मेरे भाई और बहन ट्रैम्पोलिन खेल रहे थे। कुछ विस्फोट हुए। कोई भी बच नहीं सका।' उन्होंने दावा किया कि आग बुझाने के लिए कोई उपकरण नहीं था और कोई फायर अलार्म सुनाई नहीं दिया।.
राजकोट : प्रदीप सिंह चौहान राजकोट सिविल अस्पताल के बाहर लापता लोगों के कई चिंतित रिश्तेदारों के बीच खड़े थे। आंखों में आंसू, सीने में दर्द और चेहरे पर मायूसी लिए प्रदीप बदहवास हो चुके थे। भीषण गर्मी में वह बिना खाना- पानी के अपने प्रियजनों की तलाश में जुटे थे। उनका दिल बैठा जा रहा है। प्रदीप के परिवार से 5 सदस्य उस समय टीआरपी गेम जोन में मौजूद थे, जब वहां भीषण आग लगी। उनका 15 वर्षीय बेटा, उनका साला और उनकी बहन का परिवार वहां मौजूद था। प्रदीप चौहान ने कहा, 'मेरे परिवार के दो सदस्य बच्चों को बचाने के लिए दूसरी मंजिल पर गए, लेकिन वे बाहर नहीं आ सके।' मृतकों की संख्या 33 हो गई है। बुरी तरह जले शवों की पहचान नहीं हो पाई, जिसके लिए डीएनए परीक्षण की आवश्यकता है और इसमें समय लगेगा।अधिकारियों ने आग लगने के बाद लापता लोगों की सूची तैयार की है। प्रदीप ने बताया कि उनके परिवार से लापता लोगों में एक नवविवाहित कपल विवेक , और खुशाली दुसारा हैं। उनकी भाभी तिशा वहां मौजूद थीं।गिर सोमनाथ से आया परिवारगिर सोमनाथ जिले में रहने वाले इस परिवार ने रात भर बिना सोए गुजारी, क्योंकि वे फोन पर जोड़े से संपर्क नहीं कर पाए। वे रविवार को राजकोट पहुंचे। विवेक और खुशाली की शादी दो महीने पहले ही हुई थी। शादी के बाद दोनों खुश थे। एक-दूसरे के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए घूमने निकले थे और वीकेंड पर बाहर गए थे। रेक्स्यू के काम में जुटा, गवाईं जानसुरपाल सिंह जडेजा अपने दो दोस्तों के साथ खेल क्षेत्र में गए थे, लेकिन बाद में उन्हें लापता घोषित कर दिया गया। उनके पिता पथुभा ने कहा, 'मेरा बेटा बचाव कार्य में शामिल था। वह लोगों को बचा रहा था। मैं उसके संपर्क में था। लेकिन कुछ समय बाद हमारा संपर्क टूट गया।' 22 वर्षीय कल्पेश बागदा पिछले दो सालों से गेम जोन में काम कर रहे थे। अब उन्हें मृत मान लिया गया है। बागदा अपने परिवार के लिए उम्मीद की किरण थे। उनके चाचा मनसुखभाई ने दुख जताते हुए कहा, 'कल्पेश का परिवार उनकी नई नौकरी से अच्छी ज़िंदगी की उम्मीद कर रहा था। लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया है।'यूपी के युवक की भी मौतउत्तर प्रदेश से 20 दिन पहले ही गेम जोन में काम करने आया 17 वर्षीय मोनू गौड़ भी लापता सूची में हैं। उसकी मौसी संगीता ने कहा कि अगर हमें पता होता कि यह काम उसकी जान ले लेगा तो मैं उसे यहां नहीं बुलाती। दक्ष, अपने 10 वर्षीय चचेरे भाई के साथ गेम जोन में गया था, दक्ष की भी दर्दनाक मौत हो गई। उसने बताया, 'आग आपातकालीन निकास द्वार के पास लगी और इससे एग्जिट गेट ब्लॉक हो गया। यह क्षेत्र टिन की चादर से ढका हुआ था। मैंने बाहर निकलने के लिए इसे लात मारकर तोड़ दिया। कुछ लोग पहली मंजिल से कूद गए। जो कूद नहीं पाए, वे मर गए।'ऐसे जडेजा परिवार ने अपनों को खोयादक्ष के भाई के हाथ और माथे पर चोटें आईं और उसका इलाज चल रहा है। वीकेंड की सैर दुख की घड़ी में तब्दील हो गई। जडेजा परिवार भी इस गेम जोन में मौजूद था, जब इसमें भीषण आग लग गई। विरेंद्र सिंह जडेजा की बेटी देविकाबा जडेजा ने कहा, 'मेरे पिता आग लगने के बाद मेरे भाई और तीन अन्य रिश्तेदारों को बचाने के लिए गेम जोन की ऊपरी मंजिल पर पहुंचने के बाद लापता हो गए।'देविकाबा ने कहा कि जडेजा परिवार के जो 5 सदस्य लापता हैं, उन्हें मृत मान लिया गया है, जिनमें से तीन 10-15 साल की उम्र के बच्चे हैं। उन्होंने कहा, 'जब आग लगी तो हम रेस्तरां में बैठे थे। मेरे पिता और मामा दौड़कर वहां पहुंचे, जहां मेरे भाई और बहन ट्रैम्पोलिन खेल रहे थे। कुछ विस्फोट हुए। कोई भी बच नहीं सका।' उन्होंने दावा किया कि आग बुझाने के लिए कोई उपकरण नहीं था और कोई फायर अलार्म सुनाई नहीं दिया।
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