बैटन रोग जेनेटिक डिसऑर्डर के कारण होने वाली बीमारियों के समूह का नाम है। इसे NCL यानी न्यूरोनल सिरायड लिपोफिसिनोसिस के नाम से भी जाना जाता है। यह बच्चों और बड़ों दोनों को ही प्रभावित करती है।
इस समूह में 13 बीमारियां शामिल होती है। यह लक्षण, गंभीरता और जिस उम्र वर्ग को प्रभावित करती हैं, के आधार पर अलग अलग विभाजित होती हैं। इन बीमारियों का कोई इलाज नहीं होता है लेकिन लक्षणों को कम करने के लिए प्रयास किए जा सकते हैं। आपको इस बीमारी के लक्षण तब तक दिखाई नहीं देते हैं जब तक यह गंभीर रूप न ले लें। इसके लक्षण आपको कब दिखाई देंगे यह बात भी आपको इस बीमारी का कौन सा भाग प्रभावित कर रहा है, इस पर निर्भर करती है। क्या है बैटन रोग? यह एक काफी दुर्लभ बीमारी है। यह एक तरह का जेनेटिक डिसऑर्डर है जो नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। जब आपके जीन्स के म्यूटेशन आपकी सेल के सबसे छोटे हिस्से लाइसोसोम को प्रभावित करते हैं, तब यह बीमारी होती है। सेल के अंदर ही यह लाइसोसोम टूट जाते हैं। इसके बाद यह रिसाइकल होते हैं या वहीं खत्म हो जाते हैं। जब यह खत्म होने की प्रक्रिया बाधित होती है तो सेल्यूलर वेस्ट इकट्ठा होने लगता है जिस कारण शरीर में लक्षण देखने को मिलते हैं। लक्षण शुरुआत में आपको इसके काफी हल्के फुल्के लक्षण देखने को मिलेंगे। शुरुआत की स्टेज में सीजर, देखने में कमी आना, याद करने में समस्या महसूस होना या विकास में बाधा आना, पुरानी स्किल्स को भूल जाना, डिमेंशिया, बैलेंस बनाने में मुश्किल आना आदि जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। जैसे जैसे यह स्थिति गंभीर होती जाती है तो लक्षण भी गंभीर होने लगते हैं, आपका मूड और व्यवहार बदलने लगता है, नींद आने में और बैलेंस बनने में दिक्कत आने लगती है, चीजें सीखने और याद करने में मुश्किल होने लगती है, अंधापन, हर समय दुविधा में रहना, दिल से जुड़ी समस्याएं, पैरालिसिस आदि जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। कारण यह एक इन्हेरिटेड डिसऑर्डर होता है। इसका अर्थ है जब आपके माता पिता के जीन्स की खामियां आपके अन्दर आ जाती हैं तब ही यह बीमारी आपको होती है। ऑटोसोमल रिसेसिव नाम के जीन के कारण यह बीमारी होती है। अगर किसी को इस जीन की केवल एक कॉपी होती है तो आपको इसके लक्षण नहीं देखने को मिलते हैं। हालांकि यह बीमारी काफी दुर्लभ होती है और काफी कम देखने को मिलती है। इस बीमारी का इलाज वैसे तो इस बीमारी का कोई इलाज नहीं होता है। इलाज से इस बीमारी को बढ़ने से नहीं रोका जा सकता है। केवल इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है और आपके जीवन जीने के स्तर को बढ़ाया जा सकता है। इस बीमारी को ठीक करने के लिए कुछ दवाइयां उपलब्ध होती हैं जैसे एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी आदि। इसके अलावा कुछ और दवाइयां जैसे एंटी सीजर दवाइयां, डिप्रेशन और एंजाइटी की दवाइयां, पारकिंसन की दवाइयां आदि का प्रयोग लक्षणों को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकता है। अगर आपके घर में किसी बच्चे या बड़े को यह बीमारी पाई जाती है तो पहले डॉक्टर के पास ले जा कर उनके सब टाइप का पता लगाना जरूरी होता है। उसी हिसाब से डॉक्टर दवाई या उपचार का तरीका सुझा सकते हैं। निष्कर्ष अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसे यह बीमारी है तो उन्हें इस स्थिति में सपोर्ट करना काफी आवश्यक होता है ताकि वह अपनी सामान्य जिंदगी जी सकें और खुद को अलग महसूस न करें। इसके लक्षणों को मैनेज करने में आप उनकी मदद कर सकते हैं।डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।.
इस समूह में 13 बीमारियां शामिल होती है। यह लक्षण, गंभीरता और जिस उम्र वर्ग को प्रभावित करती हैं, के आधार पर अलग अलग विभाजित होती हैं। इन बीमारियों का कोई इलाज नहीं होता है लेकिन लक्षणों को कम करने के लिए प्रयास किए जा सकते हैं। आपको इस बीमारी के लक्षण तब तक दिखाई नहीं देते हैं जब तक यह गंभीर रूप न ले लें। इसके लक्षण आपको कब दिखाई देंगे यह बात भी आपको इस बीमारी का कौन सा भाग प्रभावित कर रहा है, इस पर निर्भर करती है। क्या है बैटन रोग? यह एक काफी दुर्लभ बीमारी है। यह एक तरह का जेनेटिक डिसऑर्डर है जो नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। जब आपके जीन्स के म्यूटेशन आपकी सेल के सबसे छोटे हिस्से लाइसोसोम को प्रभावित करते हैं, तब यह बीमारी होती है। सेल के अंदर ही यह लाइसोसोम टूट जाते हैं। इसके बाद यह रिसाइकल होते हैं या वहीं खत्म हो जाते हैं। जब यह खत्म होने की प्रक्रिया बाधित होती है तो सेल्यूलर वेस्ट इकट्ठा होने लगता है जिस कारण शरीर में लक्षण देखने को मिलते हैं। लक्षण शुरुआत में आपको इसके काफी हल्के फुल्के लक्षण देखने को मिलेंगे। शुरुआत की स्टेज में सीजर, देखने में कमी आना, याद करने में समस्या महसूस होना या विकास में बाधा आना, पुरानी स्किल्स को भूल जाना, डिमेंशिया, बैलेंस बनाने में मुश्किल आना आदि जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। जैसे जैसे यह स्थिति गंभीर होती जाती है तो लक्षण भी गंभीर होने लगते हैं, आपका मूड और व्यवहार बदलने लगता है, नींद आने में और बैलेंस बनने में दिक्कत आने लगती है, चीजें सीखने और याद करने में मुश्किल होने लगती है, अंधापन, हर समय दुविधा में रहना, दिल से जुड़ी समस्याएं, पैरालिसिस आदि जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। कारण यह एक इन्हेरिटेड डिसऑर्डर होता है। इसका अर्थ है जब आपके माता पिता के जीन्स की खामियां आपके अन्दर आ जाती हैं तब ही यह बीमारी आपको होती है। ऑटोसोमल रिसेसिव नाम के जीन के कारण यह बीमारी होती है। अगर किसी को इस जीन की केवल एक कॉपी होती है तो आपको इसके लक्षण नहीं देखने को मिलते हैं। हालांकि यह बीमारी काफी दुर्लभ होती है और काफी कम देखने को मिलती है। इस बीमारी का इलाज वैसे तो इस बीमारी का कोई इलाज नहीं होता है। इलाज से इस बीमारी को बढ़ने से नहीं रोका जा सकता है। केवल इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है और आपके जीवन जीने के स्तर को बढ़ाया जा सकता है। इस बीमारी को ठीक करने के लिए कुछ दवाइयां उपलब्ध होती हैं जैसे एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी आदि। इसके अलावा कुछ और दवाइयां जैसे एंटी सीजर दवाइयां, डिप्रेशन और एंजाइटी की दवाइयां, पारकिंसन की दवाइयां आदि का प्रयोग लक्षणों को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकता है। अगर आपके घर में किसी बच्चे या बड़े को यह बीमारी पाई जाती है तो पहले डॉक्टर के पास ले जा कर उनके सब टाइप का पता लगाना जरूरी होता है। उसी हिसाब से डॉक्टर दवाई या उपचार का तरीका सुझा सकते हैं। निष्कर्ष अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसे यह बीमारी है तो उन्हें इस स्थिति में सपोर्ट करना काफी आवश्यक होता है ताकि वह अपनी सामान्य जिंदगी जी सकें और खुद को अलग महसूस न करें। इसके लक्षणों को मैनेज करने में आप उनकी मदद कर सकते हैं।डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
जेनेटिक म्यूटेशन क्या होता है लाइसोसोम का काम क्या होता है ऑटोसोमल रिसेसिव जीन के कारण होने वाला रोग एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी क्या है
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