600 से अधिक बहुराष्ट्रीय एवं घरेलू डिजिटल कंपनियों और स्टार्टअप्स के संगठन इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया IAMAI ने भी डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स पर अपने सुझाव वित्त मंत्रालय को सौंपे हैं। इसमें एंजेल टैक्स खत्म करने इसोप से जुड़े टैक्स नियम बदलने हेल्थ इंश्योरेंस में जीएसटी पर कमी करने जीएसटी रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों को व्यवस्थित करने...
प्राइम टीम, नई दिल्ली। आम बजट आने में सिर्फ एक दिन का समय रह गया है। मोदी 3.0 सरकार के इस पहले बजट का आम लोगों से लेकर, एमएसएमई, इंडस्ट्री या स्टार्टअप सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इंडस्ट्री संगठनों ने बजट को लेकर अपने सुझाव भी सरकार से साझा किए हैं। 600 से अधिक बहुराष्ट्रीय एवं घरेलू डिजिटल कंपनियों और स्टार्टअप्स के संगठन इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भी डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स पर अपने सुझाव वित्त मंत्रालय को सौंपे हैं। इसोप में मिले शेयर बेचने पर ही लगे टैक्स IAMAI के मुताबिक, अभी इसोप को कर्मचारी का लाभ मान कर उस पर टैक्स लगाया जाता है। इससे उन कर्मचारियों को कैश फ्लो की दिक्कत होती है, जो तत्काल शेयर नहीं बेचते हैं। वर्ष 2020 के बजट में स्टार्टअप के लिए अलग विकल्प दिए गए थे। इसोप मिलने के 5 साल तक, कर्मचारी के कंपनी छोड़ने तक या शेयर बेचने तक, इनमें से जो भी पहले हो तब तक टैक्स नहीं देना पड़ेगा। लेकिन इससे समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इसोप के जरिए कंपनी को प्रतिभाओं को आकर्षित करने में मदद मिलती है। इसलिए एसोसिएशन का सुझाव है कि इसोप पर तभी टैक्स लगाया जाए जब कर्मचारी उसे बेचे। शेयर जिस कीमत पर बेचा गया है उसके हिसाब से टैक्स लगे। यह सुविधा सिर्फ स्टार्टअप नहीं बल्कि हर कंपनी को मिले। एंजेल टैक्स खत्म करने की सिफारिश आयकर कानून की धारा 56 के तहत वर्ष 2012 में एंजेल टैक्स लाया गया था। इसका मकसद बेहिसाब पैसे का सर्कुलेशन रोकना था। इस प्रावधान के तहत कोई अनलिस्टेड कंपनी जिस कीमत पर शेयर जारी करती है और उस शेयर की उचित मार्केट वैल्यू के अंतर पर टैक्स लगता है। मर्चेंट बैंकर बुक वैल्यू अथवा डिस्काउंटेड कैश फ्लो के आधार पर उचित मार्केट वैल्यू तय करता है। लेकिन इस कानून की वजह से स्टार्टअप को प्रीमियम पर फंड जुटाने में चुनौती आ रही है। इसलिए आईएएमएआई ने एंजेल टैक्स को पूरी तरह खत्म करने का सुझाव दिया है। रिवर्स फ्लिपिंग की अड़चनें दूर होनी चाहिए हाल के वर्षों में अनेक भारतीयों ने अपनी पेरेंट्स कंपनी दूसरे देश में स्थापित की है। ये पेरेंट कंपनियां शुरुआती दौर में फंडिंग उपलब्ध कराती हैं और अपनी भारतीय सब्सिडियरी के माध्यम से भारत में बिजनेस करती हैं। एक नया ट्रेंड रिवर्स फ्लिपिंग का चला है, जिसमें पेरेंट कंपनियां भारत लौट रही हैं। लेकिन इस बदलाव में स्टार्टअप को कई कानूनी और प्रक्रियागत चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आईएएमएआई का सुझाव है कि कंपनी कानून की धारा 230-232 के तहत एनसीएलटी की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, खासकर होल्डिंग कंपनी और उनकी सब्सिडियरी के विलय के मामले में। इसके लिए कंपनी कानून की धारा 233 में भी कुछ संशोधन की जरूरत है। अपंजीकृत पार्टनर्स द्वारा डिलीवरी सर्विस IAMAI के मुताबिक, सीजीएसटी एक्ट 2017 के सेक्शन 9 का इस्तेमाल असंगठित सेक्टर में जैसे कि कामगारों द्वारा डिलीवरी सर्विस में होता है। यह टैक्स के दायरे में है। इससे जहां एक तरफ उपभोक्ताओं पर 18 फीसद बोझ बढ़ता है, वहीं दूसरी तरफ डिलीवरी वर्कर की आय पर भी इसका असर पड़ता है। सामान्यत : डिलीवरी वर्कर 1 लाख रुपये सालाना कमाते हैं और जीएसटी के लिए उत्तरदाई नहीं होते हैं। IAMAI ने अपनी सिफारिश में कहा है कि अपंजीकृत भागीदारों द्वारा डिलीवरी सेवाओं के लिए 5% पर एक अलग जीएसटी की पेशकश की आवश्यकता है। सर्विस प्रोवाइडर के लिए टैक्स रेट फोटोग्राफी और इवेंट बुकिंग जैसी सेवाओं पर 18% कर लगता है, लेकिन कई व्यक्तिगत प्रदाता उच्च दरों और असंगठित क्षेत्र की प्रकृति के कारण जीएसटी का भुगतान नहीं करते हैं। IAMAI ने सिफारिश की है कि कर अनुपालन को प्रोत्साहित करने और बेहिसाब धन को कम करने के लिए सभी सेवा प्रदाताओं के लिए जीएसटी दरों को 5% तक कम करना चाहिए। जीएसटी पंजीकरण को सुव्यवस्थित करना जीएसटी पंजीकरण और संशोधनों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों का अभाव है। असंगत दस्तावेज और मंजूरी मिलने में देरी कारोबार को प्रभावित करते हैं। IAMAI की सिफारिश है कि दस्तावेज़ीकरण के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाने की आवश्यकता है। समान प्रक्रियाओं को लागू किया जाना चाहिए। आवेदन अस्वीकृति के कारण स्पष्ट किए जाने की जरूरत है। सटीक अनुमोदन के समयसीमा निर्धारित की जानी चाहिए। व्यवसाय के अतिरिक्त स्थानों के लिए अनावश्यक भौतिक सत्यापन को समाप्त किया जाना चाहिए। राज्य-वार ट्रायल बैलेंस की आवश्यकता: अधिकारी ऑडिट के लिए राज्य-वार ट्रायल बैलेंस की मांग करते हैं, जबकि ये नियम में नहीं है। IAMAI की सिफारिश है कि बजट यह स्पष्टीकरण जारी हो कि राज्य-वार ट्रायल बैलेंसकी कानूनी रूप से आवश्यकता नहीं है, जिससे अनावश्यक करदाता उत्पीड़न को रोका जा सके। होटल आवास सेवाओं के नियम में बदलाव IAMAI ने अपने बजट मेमोरेंडम में कहा है कि वर्तमान नियम होटल के स्थान को आपूर्ति के स्थान के रूप में अनिवार्य करता है, जिससे एसजीएसटी और सीजीएसटी शुल्क लगता है। जिसे राज्य के बाहर के व्यापार प्राप्तकर्ता इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में दावा नहीं कर सकते हैं। IAMAI ने सिफारिश की है कि आपूर्ति के स्थान को सेवा प्राप्तकर्ता का पंजीकरण स्थान बनाने के लिए कानून में संशोधन किया जाना चाहिए जिससे उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने की अनुमति मिल सके। ऑनलाइन ट्रेवल एजेंट का पंजीकरण ओटीए को राज्य-वार जीएसटी पंजीकरण प्राप्त करने के बोझ का सामना करना पड़ता है, जिससे प्रशासनिक लागत बढ़ जाती है। IAMAI ने सिफारिश की है कि संचालन को सुव्यवस्थित करने और लागत कम करने के लिए ओटीए को अपने केंद्रीय प्रधान कार्यालय के माध्यम से पंजीकरण करने की अनुमति प्रदान करनी चाहिए। हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी घटाने की सिफारिश मौजूदा समय में स्वास्थ्य बीमा हर किसी के लिए एक बुनियादी आवश्यकता है। स्वास्थ्य बीमा की दर कम की जानी चाहिए ताकि बड़े पैमाने पर आम जनता को इसका लाभ हो। इससे समाज के निम्न और मध्यम आय वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी। इस कटौती से बीमाकर्ताओं के लिए स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। ऐसे में इस बात की सिफारिश की जाती है कि स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी घटाकर 5% कर दिया जाए।.
प्राइम टीम, नई दिल्ली। आम बजट आने में सिर्फ एक दिन का समय रह गया है। मोदी 3.0 सरकार के इस पहले बजट का आम लोगों से लेकर, एमएसएमई, इंडस्ट्री या स्टार्टअप सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इंडस्ट्री संगठनों ने बजट को लेकर अपने सुझाव भी सरकार से साझा किए हैं। 600 से अधिक बहुराष्ट्रीय एवं घरेलू डिजिटल कंपनियों और स्टार्टअप्स के संगठन इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भी डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स पर अपने सुझाव वित्त मंत्रालय को सौंपे हैं। इसोप में मिले शेयर बेचने पर ही लगे टैक्स IAMAI के मुताबिक, अभी इसोप को कर्मचारी का लाभ मान कर उस पर टैक्स लगाया जाता है। इससे उन कर्मचारियों को कैश फ्लो की दिक्कत होती है, जो तत्काल शेयर नहीं बेचते हैं। वर्ष 2020 के बजट में स्टार्टअप के लिए अलग विकल्प दिए गए थे। इसोप मिलने के 5 साल तक, कर्मचारी के कंपनी छोड़ने तक या शेयर बेचने तक, इनमें से जो भी पहले हो तब तक टैक्स नहीं देना पड़ेगा। लेकिन इससे समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इसोप के जरिए कंपनी को प्रतिभाओं को आकर्षित करने में मदद मिलती है। इसलिए एसोसिएशन का सुझाव है कि इसोप पर तभी टैक्स लगाया जाए जब कर्मचारी उसे बेचे। शेयर जिस कीमत पर बेचा गया है उसके हिसाब से टैक्स लगे। यह सुविधा सिर्फ स्टार्टअप नहीं बल्कि हर कंपनी को मिले। एंजेल टैक्स खत्म करने की सिफारिश आयकर कानून की धारा 56 के तहत वर्ष 2012 में एंजेल टैक्स लाया गया था। इसका मकसद बेहिसाब पैसे का सर्कुलेशन रोकना था। इस प्रावधान के तहत कोई अनलिस्टेड कंपनी जिस कीमत पर शेयर जारी करती है और उस शेयर की उचित मार्केट वैल्यू के अंतर पर टैक्स लगता है। मर्चेंट बैंकर बुक वैल्यू अथवा डिस्काउंटेड कैश फ्लो के आधार पर उचित मार्केट वैल्यू तय करता है। लेकिन इस कानून की वजह से स्टार्टअप को प्रीमियम पर फंड जुटाने में चुनौती आ रही है। इसलिए आईएएमएआई ने एंजेल टैक्स को पूरी तरह खत्म करने का सुझाव दिया है। रिवर्स फ्लिपिंग की अड़चनें दूर होनी चाहिए हाल के वर्षों में अनेक भारतीयों ने अपनी पेरेंट्स कंपनी दूसरे देश में स्थापित की है। ये पेरेंट कंपनियां शुरुआती दौर में फंडिंग उपलब्ध कराती हैं और अपनी भारतीय सब्सिडियरी के माध्यम से भारत में बिजनेस करती हैं। एक नया ट्रेंड रिवर्स फ्लिपिंग का चला है, जिसमें पेरेंट कंपनियां भारत लौट रही हैं। लेकिन इस बदलाव में स्टार्टअप को कई कानूनी और प्रक्रियागत चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आईएएमएआई का सुझाव है कि कंपनी कानून की धारा 230-232 के तहत एनसीएलटी की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, खासकर होल्डिंग कंपनी और उनकी सब्सिडियरी के विलय के मामले में। इसके लिए कंपनी कानून की धारा 233 में भी कुछ संशोधन की जरूरत है। अपंजीकृत पार्टनर्स द्वारा डिलीवरी सर्विस IAMAI के मुताबिक, सीजीएसटी एक्ट 2017 के सेक्शन 9 का इस्तेमाल असंगठित सेक्टर में जैसे कि कामगारों द्वारा डिलीवरी सर्विस में होता है। यह टैक्स के दायरे में है। इससे जहां एक तरफ उपभोक्ताओं पर 18 फीसद बोझ बढ़ता है, वहीं दूसरी तरफ डिलीवरी वर्कर की आय पर भी इसका असर पड़ता है। सामान्यत : डिलीवरी वर्कर 1 लाख रुपये सालाना कमाते हैं और जीएसटी के लिए उत्तरदाई नहीं होते हैं। IAMAI ने अपनी सिफारिश में कहा है कि अपंजीकृत भागीदारों द्वारा डिलीवरी सेवाओं के लिए 5% पर एक अलग जीएसटी की पेशकश की आवश्यकता है। सर्विस प्रोवाइडर के लिए टैक्स रेट फोटोग्राफी और इवेंट बुकिंग जैसी सेवाओं पर 18% कर लगता है, लेकिन कई व्यक्तिगत प्रदाता उच्च दरों और असंगठित क्षेत्र की प्रकृति के कारण जीएसटी का भुगतान नहीं करते हैं। IAMAI ने सिफारिश की है कि कर अनुपालन को प्रोत्साहित करने और बेहिसाब धन को कम करने के लिए सभी सेवा प्रदाताओं के लिए जीएसटी दरों को 5% तक कम करना चाहिए। जीएसटी पंजीकरण को सुव्यवस्थित करना जीएसटी पंजीकरण और संशोधनों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों का अभाव है। असंगत दस्तावेज और मंजूरी मिलने में देरी कारोबार को प्रभावित करते हैं। IAMAI की सिफारिश है कि दस्तावेज़ीकरण के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाने की आवश्यकता है। समान प्रक्रियाओं को लागू किया जाना चाहिए। आवेदन अस्वीकृति के कारण स्पष्ट किए जाने की जरूरत है। सटीक अनुमोदन के समयसीमा निर्धारित की जानी चाहिए। व्यवसाय के अतिरिक्त स्थानों के लिए अनावश्यक भौतिक सत्यापन को समाप्त किया जाना चाहिए। राज्य-वार ट्रायल बैलेंस की आवश्यकता: अधिकारी ऑडिट के लिए राज्य-वार ट्रायल बैलेंस की मांग करते हैं, जबकि ये नियम में नहीं है। IAMAI की सिफारिश है कि बजट यह स्पष्टीकरण जारी हो कि राज्य-वार ट्रायल बैलेंसकी कानूनी रूप से आवश्यकता नहीं है, जिससे अनावश्यक करदाता उत्पीड़न को रोका जा सके। होटल आवास सेवाओं के नियम में बदलाव IAMAI ने अपने बजट मेमोरेंडम में कहा है कि वर्तमान नियम होटल के स्थान को आपूर्ति के स्थान के रूप में अनिवार्य करता है, जिससे एसजीएसटी और सीजीएसटी शुल्क लगता है। जिसे राज्य के बाहर के व्यापार प्राप्तकर्ता इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में दावा नहीं कर सकते हैं। IAMAI ने सिफारिश की है कि आपूर्ति के स्थान को सेवा प्राप्तकर्ता का पंजीकरण स्थान बनाने के लिए कानून में संशोधन किया जाना चाहिए जिससे उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने की अनुमति मिल सके। ऑनलाइन ट्रेवल एजेंट का पंजीकरण ओटीए को राज्य-वार जीएसटी पंजीकरण प्राप्त करने के बोझ का सामना करना पड़ता है, जिससे प्रशासनिक लागत बढ़ जाती है। IAMAI ने सिफारिश की है कि संचालन को सुव्यवस्थित करने और लागत कम करने के लिए ओटीए को अपने केंद्रीय प्रधान कार्यालय के माध्यम से पंजीकरण करने की अनुमति प्रदान करनी चाहिए। हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी घटाने की सिफारिश मौजूदा समय में स्वास्थ्य बीमा हर किसी के लिए एक बुनियादी आवश्यकता है। स्वास्थ्य बीमा की दर कम की जानी चाहिए ताकि बड़े पैमाने पर आम जनता को इसका लाभ हो। इससे समाज के निम्न और मध्यम आय वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी। इस कटौती से बीमाकर्ताओं के लिए स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। ऐसे में इस बात की सिफारिश की जाती है कि स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी घटाकर 5% कर दिया जाए।
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