इस्लामिक रिपब्लिक ईरान से चार दशकों की असहमति का नतीजा यह मिला कि इससे न तो ईरान ने घुटने टेके और न इलाक़े में शांति स्थापित हुई.
1971 में यूगोस्लाविया के तत्कालीन राष्ट्रपति जोसिप ब्रोज़ टीटो, मोनाको के प्रिंस रेनीअर और राजकुमारी ग्रेस, अमरीका के उपराष्ट्रपति सिप्रो अग्नेयू और सोवियत संघ के स्टेट्समैन निकोलई पोगर्नी ईरानी शहर पर्सेपोलिस में जुटे थे.
ये सभी एक शानदार पार्टी में शामिल हुए थे. इस पार्टी का आयोजन ईरानी शाह रज़ा पहलवी ने की थी. लेकिन आठ सालों से कम वक़्त में भी ईरान में नए नेता अयतोल्लाह रुहोल्लाह ख़ुमैनी का आगमन हुआ और उन्होंने इस पार्टी को शैतानों का जश्न क़रार दिया था. 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति से पहले ख़ुमैनी तुर्की, इराक़ और पेरिस में निर्वासित जीवन जी रहे थे. ख़ुमैनी, शाह पहलवी के नेतृत्व में ईरान के पश्चिमीकरण और अमरीका पर बढ़ती निर्भरता के लिए उन्हें निशाने पर लेते थे.1953 में अमरीका और ब्रिटेन ने ईरान में लोकतांत्रिक तरीक़े से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग को अपदस्थ कर पहलवी को सत्ता सौंप दी थी. मोहम्मद मोसादेग ने ही ईरान के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया था और वो चाहते थे कि शाह की शक्ति कम हो. किसी विदेशी नेता को शांतिपूर्ण वक़्त में अपदस्थ करने का काम अमरीका ने पहली बार ईरान में किया. लेकिन यह आख़िरी नहीं था. इसके बाद अमरीका की विदेश नीति का यह एक तरह से हिस्सा बन गया. 1953 में ईरान में अमरीका ने जिस तरह से तख्तापलट किया उसी का नतीजा 1979 की ईरानी क्रांति थी. इन 40 सालों में ईरान और पश्चिम के बीच कड़वाहट ख़त्म नहीं हुई. ईरान में क्रांति के बाद आई रूढ़िवादिता को लेकर प्रोजेक्ट सिंडिकेट ने अपनी एक रिपोर्ट में जर्मन दार्शनिक हना एरेंट की एक टिप्पणी का उल्लेख किया है. एरेंट ने कहा था, ''ज़्यादातर उग्र क्रांतिकारी क्रांति के बाद रूढ़िवादी बन जाते हैं.'' कहा जाता है कि ख़ुमैनी के साथ भी ऐसा ही हुआ. सत्ता में आने के बाद ख़ुमैनी की उदारता में अचानक से परिवर्तन आया. उन्होंने ख़ुद को वामपंथी आंदोलनों से अलग कर लिया.विरोधी आवाज़ों को दबाना शुरू कर दिया और इस्लामिक रिपब्लिक और ईरान की लोकतांत्रिक आवाज़ में एक किस्म की दूरियां बननी शुरू हो गई थीं. क्रांति के परिणामों के तत्काल बाद ईरान और अमरीका के राजनयिक संबंध ख़त्म हो गए. तेहरान में ईरानी छात्रों के एक समूह ने अमरीकी दूतावास को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था और 52 अमरीकी नागरिकों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा था. कहा जाता है कि इसमें ख़ुमैनी का भी मौन समर्थन था. अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर से इनकी मांग थी कि शाह को वापस भेजें. शाह न्यूयॉर्क में कैंसर का इलाज कराने गए थे. बंधकों को तब तक रिहा नहीं किया गया जब तक रोनल्ड रीगन अमरीका के राष्ट्रपति नहीं बन गए. आख़िरकार पहलवी की मिस्र में मौत हो गई और ख़ुमैनी ने अपनी ताक़त को और धर्म केंद्रित किया. इन सबके बीच सद्दाम हुसैन ने 1980 में ईरान पर हमला बोल दिया. ईरान और इराक़ के बीच आठ सालों तक ख़ूनी युद्ध चला. इस युद्ध में अमरीका सद्दाम हुसैन के साथ था. यहां तक कि सोवियत यूनियन ने भी सद्दाम हुसैन की मदद की थी.यह युद्ध एक समझौते के साथ ख़त्म हुआ. युद्ध में कम से कम पांच लाख ईरानी और इराक़ी मारे गए थे. कहा जाता है कि इराक़ ने ईरान में रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था और ईरान में इसका असर लंबे समय तक दिखा. यह वही समय था जब ईरान ने परमाणु बम की संभावनाओं को देखना शुरू कर दिया था. शाह के वक़्त में अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति आइज़नहावर के वक़्त में परमाणु-ऊर्जा संयत्र बनाने की कोशिश की थी. ईरान ने परमाणु कार्यक्रम पर जो काम करना शुरू किया था वो 2002 तक छुपा रहा. अमरीका का इस इलाक़े में समीकरण बदला इसलिए नाटकीय परिवर्तन देखने को मिला. अमरीका ने न केवल सद्दाम हुसैन को समर्थन करना बंद किया बल्कि इराक़ में हमले की तैयारी शुरू कर दी थी. कहा जाता है कि अमरीका के इस विनाशकारी फ़ैसले का अंत ईरान को मिले अहम रणनीतिक फ़ायदे से हुआ. हालांकि ईरान अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के प्रसिद्ध टर्म 'एक्सिस ऑफ इवल' में शामिल हो गया था. आगे चलकर यूरोप ने ईरान से परमाणु कार्यक्रम पर बात करना शुरू किया. जेवियर सालोना उस वक़्त यूरोपीय यूनियन के प्रतिनिधि के तौर पर ईरान से बात कर रहे थे.उन्होंने प्रोजेक्ट सिंडिकेट की एक रिपोर्ट में कहा है कि ईरान में 2005 का चुनाव था और इस वजह से बातचीत पर कोई कामयाबी नहीं मिली. 2013 में जब हसन रूहानी फिर से चुने गए तो विश्व समुदाय ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर फिर से बात शुरू की. दशकों की शत्रुता के बीच ओबामा प्रशासन 2015 में जॉइंट कॉम्परहेंसिव प्लान ऑफ ऐक्शन पहुंचा. इसे बड़ी राजनीतिक कामयाबी के तौर पर देखा गया. इस बार अमरीका में चुनाव आया और ट्रंप ने एकतरफ़ा फ़ैसला लेते हुए इस समझौते को रद्द कर दिया. ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए. यहां तक कि ट्रंप ने दुनिया के देशों को धमकी देते हुए कहा कि ईरान से व्यापार जो करेगा वो अमरीका से कारोबारी संबंध नहीं रख पाएगा. इसका नतीजा यह हुआ कि ईरान पर अमरीका और यूरोप में खुलकर मतभेद सामने आए. यूरोपीय यूनियन ने ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को बचाने की कोशिश की लेकिन ट्रंप नहीं माने. अब अमरीका वॉर्सोवा में मध्य-पूर्व पर एक सम्मेलन करा रहा है. वो चाहते हैं कि ईरान विरोधी गठजोड़ में इसराइल, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ यूरोप भी एकमत से शामिल हो जाए. ईरान एक बार फिर से संकट में घिरा हुआ है. पिछले 40 सालों में ईरान ने कई संकट देखे लेकिन इस बार का संकट भी कम दुखदायी नहीं है. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप शत्रुतापूर्ण नीतियों से इस इलाक़े में शांति स्थापित नहीं कर सकते हैं और उन्हें ईरान को बातचीत का हिस्सा बनाना चाहिए.
United States Latest News, United States Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
मंडी में 250 फीट गहरी खाई में गिरी जीप, 5 की मौत और 6 गंभीर घायलमंडी जिले में डायना पार्क के अग्नि गांव के नजदीक हुआ हादसा स्थानीय लोगों की मदद से मृतकों के शव और घायलों को खाई से बाहर निकाला गया | A jeep collapses in the ditch 5 people die
Read more »
दिल्ली: सिविल लाइंस इलाके में कार और साइकिल की टक्कर, बुजुर्ग की मौतएक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना बुधवार रात में उस समय हुई जब पीड़ित एक सिग्नल से दाहिने ओर मुड़ा और विपरीत दिशा से आ रही कार ने उनकी साइकिल में टक्कर मार दी.
Read more »
10वीं और 12वीं की परीक्षा में फेल हुए छात्र अब जून में दे सकेंगे परीक्षाप्रदेश के छात्रों के शैक्षणिक वर्ष को बचाने के उद्देश्य से बोर्ड द्वारा लिया गया ऐतिहासिक निर्णय राज्य मुक्त विद्यालय एसओएस के माध्यम से परीक्षा दे सकेंगे छात्र | Students failed in 10th and 12th class can reappear in exams in June.
Read more »
कम्प्यूटर बाबा ने प्रज्ञा की तुलना रावण से और शिवराज की शकुनी से कीबोले- दिग्विजय सिंह की जीत के लिए 7000 साधु करेंगे हठ योग, फिर करेंगे रोड शो 13 अखाड़ों के साधू 7 मई को आएंगे भोपाल | loksabha chunav 2019 computer baba hatyog in bhopal
Read more »
इदलिब में सीरिया और रूस की एयरस्ट्राइक, दो बच्चों सहित नौ नागरिक की मौतसीरिया की ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने कहा सीरिया सरकार और रूस ने इदलिब हामा और अलेप्पो प्रांतों में हवाई हमले किए। जिसमें दो बच्चों सहित नौ नागरिकों की मौत हो गई।
Read more »
Phase 5 Voting: क्या BJP दोहरा पाएगी 2014 जैसा प्रदर्शन, 51 में से जीती थी 39 सीटें, 2 पर सिमटी थी कांग्रेस, 10 बड़ी बातेंकेंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh), यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी (Sonia Gandhi), कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) सहित 674 उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला आज सात राज्यों में 51 सीटों पर होने वाले चुनावों में करीब नौ करोड़ मतदाता करेंगे. सत्तारूढ़ भाजपा (BJP) और इसके सहयोगियों के लिए काफी कुछ दांव पर लगा हुआ है क्योंकि 2014 के चुनावों में इसने इनमें से 40 सीटों पर जीत दर्ज की थी और दो सीटों पर कांग्रेस (Congress) ने जीत हासिल की थी जबकि शेष पर अन्य विपक्षी दलों ने जीत हासिल की. उत्तरप्रदेश में 14 सीटों, राजस्थान में 12 सीटों, पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश में सात- सात सीटों पर चुनाव होंगे जबकि बिहार में पांच और झारखंड में चार सीटों के लिए चुनाव होना है. जम्मू-कश्मीर के लद्दाख सीट और अनंतनाग सीट के लिए पुलवामा और शोपियां जिलों में चुनाव होना है. चुनाव आयोग (Election Commission) ने 94 हजार मतदान केंद्रों का निर्माण किया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए हैं. पांचवें और सबसे छोटे चरण में 8.75 करोड़ मतदाता 674 उम्मीदवारों के भविष्य तय करेंगे. इस चरण के साथ ही 424 सीटों पर चुनाव खत्म हो जाएंगे और शेष 118 सीटों पर 12 मई और 19 मई को चुनाव होंगे.
Read more »
क्या युद्ध की कग़ार पर खड़े हैं अमरीका और ईरानअमरीका ने मध्य पूर्व में अपना युद्धपोत ऐसे वक़्त में भेजा है जब उसके और ईरान के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं.
Read more »
Elections 2019: कांग्रेस में शामिल हुईं पंजाब में मारे गए गैंगस्टर की बहन और मांअकाली दल को उस वक्त करारा झटका लगा, जब मारे गए गैंगस्टर जसविंदर सिंह रॉकी की बहन राजदीप कौर और उसकी मां हरमंदर कौर ने मंगलवार को पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गईं.
Read more »
चुनावनामा 1991: मंडल-मंदिर और सहानुभूति की लहर के बीच कांग्रेस की हुई सत्ता में वापसीलोकसभा चुनाव 2019 के छठवें चरण में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी राजनीति का केंद्र बन चुके हैं. राजीव गांधी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के छिड़ी नई जुबानी जंग छिड़ चुकी है.
Read more »
