ईरान-इजरायल जंग के बीच मोदी सरकार ने एक बेहद अहम डेटा शेयर किया है। विदेश मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि अभ तक कितने भारतीयों को किस रास्ते से निकाला जा चुका है।
नई दिल्ली: ईरान बनाम इजरायल और अमेरिका युद्ध में भारत की दो बड़ी चिंताएं हैं। पहली तो तेल की समस्या से जुड़ी है, जिसके समाधान के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है। वहीं, दूसरी चिंता जंग में घिरे ईरान से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी को लेकर है। भारत सरकार ने इस परेशानी पर ध्यान देते हुए ईरान से भारतीय नागरिकों को एक खास रास्ते से निकालना शुरू कर दिया है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया है कि अब तक ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित हमारे दूतावास ने 1,171 भारतीय नागरिकों को वहां से निकालने में मदद की है। खास बात यह है कि इनमें 818 भारतीय छात्र शामिल हैं। इन छात्रों को ईरान से निकालने के लिए जमीनी सीमा का इस्तेमाल किया गया। इन्हें जमीनी मार्ग के जरिए ईरान से निकालकर आर्मेनिया और अजरबैजान में पहुंचाया गया है। ईरान से इस तरह निकाले जा रहे भारतीय!विदेश मंत्रालय का यह कदम बेहद अहम है। क्योंकि, ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग के दौरान विपक्ष लगातार सरकार से यह सवाल पूछ रहा था कि उन्होंने ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए क्या योजना बनाई है। ऐसे में विदेश मंत्रालय ने अपने बयान से स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए जमीनी रास्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है।पश्चिम एशिया के संघर्ष पर साझा किए विचारविदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि कूटनीतिक मोर्चे पर भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ लगातार जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन से बात की और दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही पीएम ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और इस क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया। भारत के विदेश मंत्री ने पुर्तगाल के विदेश मंत्री पाउलो रंजेल के साथ बातचीत की। दोनों ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर अपने विचार साझा किए।.
नई दिल्ली: ईरान बनाम इजरायल और अमेरिका युद्ध में भारत की दो बड़ी चिंताएं हैं। पहली तो तेल की समस्या से जुड़ी है, जिसके समाधान के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है। वहीं, दूसरी चिंता जंग में घिरे ईरान से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी को लेकर है। भारत सरकार ने इस परेशानी पर ध्यान देते हुए ईरान से भारतीय नागरिकों को एक खास रास्ते से निकालना शुरू कर दिया है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया है कि अब तक ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित हमारे दूतावास ने 1,171 भारतीय नागरिकों को वहां से निकालने में मदद की है। खास बात यह है कि इनमें 818 भारतीय छात्र शामिल हैं। इन छात्रों को ईरान से निकालने के लिए जमीनी सीमा का इस्तेमाल किया गया। इन्हें जमीनी मार्ग के जरिए ईरान से निकालकर आर्मेनिया और अजरबैजान में पहुंचाया गया है।ईरान से इस तरह निकाले जा रहे भारतीय!विदेश मंत्रालय का यह कदम बेहद अहम है। क्योंकि, ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग के दौरान विपक्ष लगातार सरकार से यह सवाल पूछ रहा था कि उन्होंने ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए क्या योजना बनाई है। ऐसे में विदेश मंत्रालय ने अपने बयान से स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए जमीनी रास्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है।पश्चिम एशिया के संघर्ष पर साझा किए विचारविदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि कूटनीतिक मोर्चे पर भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ लगातार जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन से बात की और दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही पीएम ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और इस क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया। भारत के विदेश मंत्री ने पुर्तगाल के विदेश मंत्री पाउलो रंजेल के साथ बातचीत की। दोनों ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर अपने विचार साझा किए।
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