चीन और पाकिस्तान ने पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के लिए प्रस्ताव पेश किया है। इसमें उन्होंने पांच मुद्दों पर बात की है लेकिन इस पूरे प्रपोजल का जमीन पर उतरना आसान बिल्कुल नहीं है।
बीजिंग: चीन और पाकिस्तान ने ईरान में 28 फरवरी से चल रहे जंग को खत्म करने के लिए 5-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पेश किया है। यह प्रस्ताव बीजिंग में चीनी और पाकिस्तानी विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद आया है। चीन और पाकिस्तान ने ईरान में चल रहे युद्ध से हो रहे नुकसान पर चिंता जताते हुए शांति पर जोर दिया है। दोनों देशों ने युद्ध रोकने जैसी अच्छी बात जरूर की है लेकिन उनकी ओर से पेश किए गए प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाना आसान नहीं होगा। चीन-पाकिस्तान की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव की मुश्किलों पर बात करने से पहले जान लेते हैं कि इसमें क्या-क्या है। इस प्रस्ताव के पांच प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं। 1.
तत्काल युद्धविरामचीन और पाकिस्तान ने प्रस्ताव में सबसे पहले शत्रुता को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया है। साथ ही आगे तनाव बढ़ने से रोकने के प्रयासों पर जोर दिया गया है। प्रभावित क्षेत्रों तक मानवीय सहायता पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।2. शीघ्र शांति वार्तादोनों देशों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ईरान और खाड़ी देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय स्वतंत्रता और सुरक्षा की रक्षा की जानी चाहिए। साथ ही विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए3. बुनियादी ढांचे की सुरक्षाप्रस्ताव के तीसरे बिंदु में अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के कड़ाई से पालन और नागरिकों तथा गैर-सैन्य लक्ष्यों पर होने वाले हमलों को तत्काल रोकने का आह्वान किया गया है। इसमें ऊर्जा सुविधाएं, विलवणीकरण संयंत्र और परमाणु बुनियादी ढांचा शामिल है।4. शिपिंग मार्गों की सुरक्षाहोर्मुज जलडमरूमध्य के वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए यह योजना सभी पक्षों से वाणिज्यिक और नागरिक जहाजो के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने तथा सामान्य शिपिंग कार्यों को बहाल करने का आग्रह करती है।5. UN के नियमों का सम्मानचीन और पाकिस्तान की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव का पांचवां बिंदु संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मज़बूत करने और अंतर्राष्ट्रीय कानून तथा बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित एक दीर्घकालिक शांति ढांचा निर्मित करने पर जोर देता है।ईरान का कड़ा रुख बना मुश्किलपाकिस्तान ने हालिया दिनों में लगातार ईरान-अमेरिका में मध्यस्थता की कोशिश की है। चीन ने पाकिस्तान की कूटनीतिक पहल का जोरदार समर्थन किया है। दूसरी ओर ईरान ने अभी तक इस पर कड़ा रुख दिखाया है। ईरान ने साफ कहा है कि अभी तक अमेरिका की ओर से मध्यस्थों के जरिए बेतुकी मांगें रखी गई हैं, जिनका कोई मतलब नहीं निकलता है।ईरान की प्रतिक्रिया बातचीत के केंद्र में स्थापित करने की इस्लामाबाद की कोशिशों को कमजोर करती है। इतना ही नहीं पाकिस्तान की मध्यस्थ के तौर पर विश्वसनीयता पर भी सवाल हैं। ऐसे में बातचीत के वास्तविक प्रभाव का अभाव दिखाई देता है। पाकिस्तान की भूमिका फिलहाल दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने में मदद करने तक सीमित रही है।दिखावटी कोशिश और नतीजे का फर्कमनी कंट्रोल की रिपोर्ट कहती है कि चीन-पाक का पांच-पॉइंट प्लान चित-परिचित डिप्लोमैटिक टेम्पलेट दिखाता है। इसमें सीजफायर, बातचीत और मल्टीलेटरलिज्म पर फोकस किया गया है। इसका जमीन पर उतरना इस बात पर निर्भर करता है कि लड़ाई में शामिल मुख्य पार्टियां इसे स्वीकार करती हैं या नहीं।पाकिस्तान इस मौके को ग्लोबल स्टेज पर अपनी अहमियत दिखाने के लिए कर रहा है। हालांकि ईरान की सहमति और अमेरिका से स्पष्ट मंजूरी के बिना यह प्लान दिखावटी ज्यादा माना जाएगा। ऐसे में साफ है कि बीजिंग इस्लामाबाद की असली चुनौती प्रस्ताव पेश करने के बाद इसे जमीन पर उतारने की है।
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