भारतीय परिवार खाड़ी देशों में फंसे अपने प्रियजनों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रेटर नोएडा के छोलसा निवासी फातिमा ईरान के कुम में अपने बेटे से मिलने गई थीं और अब युद्ध में फंसी हैं।
आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। ईरान, इराक, सऊदी अरब समेत अन्य खाड़ी देशों में चारों ओर गिर रही मिसाइलों के धुओं के बीच फंसे भारतीय लोग अपने परिजनों से संपर्क करने की कोशिशों में लगे हुए हैं। वहीं ग्रेटर नोएडा के छोलसा निवासी फातिमा अपने बेटे मुर्तजा से मिलने के लिए ईरान के कुम गईं थी। अब वह जंग में फंसी हुई हैं। कई परिजनों ने बताया कि शनिवार रात 11 बजे के बाद से उनका संपर्क नहीं हो पाया है। इसलिए और भी उनमें दहशत बनी हुई है। वहीं, कुछ ने बताया कि जिस तरफ नजर जा रही है, उस तरफ सिर्फ गिरती मिसाइलों का धुओं और बजते सायरन की गूंज सुनाई दे रही है। थाइलाजी की पढ़ाई कर रहा बेटा ग्रेटर नोएडा के छोलसा निवासी च्यूमर हुसैन ने बताया कि उनका बेटा मुर्तजा ईरान के कुम शहर में थाइलाजी की पढ़ाई कर रहा है। उनकी पत्नी फातिमा बेटे से मिलने गई थी। उनको वापस आना था, लेकिन हमले शुरू होने के कारण वह भी वहीं फंस गई हैं। अंदर से डर सता रहा है, नेटवर्क लाइनें ध्वस्त होने के कारण संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। हालांकि, जिस स्थान पर उनके परिजन हैं वहां पर अभी हमले नहीं हुए हैं। हर तरफ दिखा रहा मिसाइलों का धुंआं छोलसा निवासी साकिब रजा ने बताया कि उनके दो भाई असद रजा व असकरी रजा ईरान के कुम शहर में करीब छह वर्षों से रह रहे हैं। एक रिश्तेदार मुस्तफा भी करीब 12 वर्षों से रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिस तरफ नजर जाती है तो सिर्फ मिसाइलों का धुंआं ही धुंआ दिखाई देता है। बताया कि शनिवार रात करीब 11 बजे के बाद से संपर्क नहीं हो पाया है। इसलिए और भी अंदर से अब डर सा लग रहा है। शनिवार रात में हुई बात के दौरान बताया था कि खाने-पीने की व्यवस्था सरकार की ओर से की गई है और उन लोगों को बेसमेंट ले जाने की व्यवस्था कराई जा रही है। गिरती मिसाइलों से दिखा खौफनाक मंजर छोलसा गांव से मुजाहिद हुसैन इराक के कर्बला में करीब दो वर्षों से रह रहे हैं और साहिद जमा इराक के नजफ शहर में दो वर्ष से निवास कर रहे हैं। इन लोगों से शनिवार की रात हुई बात में बताया गया कि अंदर से दहशत बनी हुई है। जिस तरफ जाती है तो सिर्फ गिरती मिसाइलें दिखाई देती हैं और बजते सायरनों की आवाज कानों में गूंजती है। जिस समय मिसाइलें गिर रही हैं तो सिर्फ आसपास धुंआं ही धुंआं दिखाई देता है। सभी लोगों को सुरक्षा बलों की ओर से बेसमेंट में शिफ्ट किया जा रहा है। अयातुल्ला अली खामेमेई के निधन से लोगों में दिख रहा गुस्सा छोलसा निवासी मुद्दबिल ने बताया कि उनका छोटा भाई ईरान के इस्तिहान में करीब तीन महीने से रह रहा है। जब से हमले बढ़े हैं, अंदर से डर सता रहा है, हालांकि जिस स्थान पर उनका भाई है। वहां पर अभी हमले नहीं हुए हैं, लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेमेई के मौत के बाद से स्थानीय लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। यह भी पढ़ें- 'सायरन की आवाज सुनकर ही धड़कनें हो जाती हैं तेज, डर से रात की छिन गई है नींद', बहरीन में फंसे भारतीय सत्यम की आपबीती सऊदी अरब के रियाद में ईरान के हमले से काफी नुकसान पहुंचा है। स्वजन से बात हुई है तो वह अभी सुरक्षित हैं। - जमाल इस्माइल, बीटेक छात्र शारदा विश्वविद्यालय.
आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। ईरान, इराक, सऊदी अरब समेत अन्य खाड़ी देशों में चारों ओर गिर रही मिसाइलों के धुओं के बीच फंसे भारतीय लोग अपने परिजनों से संपर्क करने की कोशिशों में लगे हुए हैं। वहीं ग्रेटर नोएडा के छोलसा निवासी फातिमा अपने बेटे मुर्तजा से मिलने के लिए ईरान के कुम गईं थी। अब वह जंग में फंसी हुई हैं। कई परिजनों ने बताया कि शनिवार रात 11 बजे के बाद से उनका संपर्क नहीं हो पाया है। इसलिए और भी उनमें दहशत बनी हुई है। वहीं, कुछ ने बताया कि जिस तरफ नजर जा रही है, उस तरफ सिर्फ गिरती मिसाइलों का धुओं और बजते सायरन की गूंज सुनाई दे रही है। थाइलाजी की पढ़ाई कर रहा बेटा ग्रेटर नोएडा के छोलसा निवासी च्यूमर हुसैन ने बताया कि उनका बेटा मुर्तजा ईरान के कुम शहर में थाइलाजी की पढ़ाई कर रहा है। उनकी पत्नी फातिमा बेटे से मिलने गई थी। उनको वापस आना था, लेकिन हमले शुरू होने के कारण वह भी वहीं फंस गई हैं। अंदर से डर सता रहा है, नेटवर्क लाइनें ध्वस्त होने के कारण संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। हालांकि, जिस स्थान पर उनके परिजन हैं वहां पर अभी हमले नहीं हुए हैं। हर तरफ दिखा रहा मिसाइलों का धुंआं छोलसा निवासी साकिब रजा ने बताया कि उनके दो भाई असद रजा व असकरी रजा ईरान के कुम शहर में करीब छह वर्षों से रह रहे हैं। एक रिश्तेदार मुस्तफा भी करीब 12 वर्षों से रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिस तरफ नजर जाती है तो सिर्फ मिसाइलों का धुंआं ही धुंआ दिखाई देता है। बताया कि शनिवार रात करीब 11 बजे के बाद से संपर्क नहीं हो पाया है। इसलिए और भी अंदर से अब डर सा लग रहा है। शनिवार रात में हुई बात के दौरान बताया था कि खाने-पीने की व्यवस्था सरकार की ओर से की गई है और उन लोगों को बेसमेंट ले जाने की व्यवस्था कराई जा रही है। गिरती मिसाइलों से दिखा खौफनाक मंजर छोलसा गांव से मुजाहिद हुसैन इराक के कर्बला में करीब दो वर्षों से रह रहे हैं और साहिद जमा इराक के नजफ शहर में दो वर्ष से निवास कर रहे हैं। इन लोगों से शनिवार की रात हुई बात में बताया गया कि अंदर से दहशत बनी हुई है। जिस तरफ जाती है तो सिर्फ गिरती मिसाइलें दिखाई देती हैं और बजते सायरनों की आवाज कानों में गूंजती है। जिस समय मिसाइलें गिर रही हैं तो सिर्फ आसपास धुंआं ही धुंआं दिखाई देता है। सभी लोगों को सुरक्षा बलों की ओर से बेसमेंट में शिफ्ट किया जा रहा है। अयातुल्ला अली खामेमेई के निधन से लोगों में दिख रहा गुस्सा छोलसा निवासी मुद्दबिल ने बताया कि उनका छोटा भाई ईरान के इस्तिहान में करीब तीन महीने से रह रहा है। जब से हमले बढ़े हैं, अंदर से डर सता रहा है, हालांकि जिस स्थान पर उनका भाई है। वहां पर अभी हमले नहीं हुए हैं, लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेमेई के मौत के बाद से स्थानीय लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। यह भी पढ़ें- 'सायरन की आवाज सुनकर ही धड़कनें हो जाती हैं तेज, डर से रात की छिन गई है नींद', बहरीन में फंसे भारतीय सत्यम की आपबीती सऊदी अरब के रियाद में ईरान के हमले से काफी नुकसान पहुंचा है। स्वजन से बात हुई है तो वह अभी सुरक्षित हैं। - जमाल इस्माइल, बीटेक छात्र शारदा विश्वविद्यालय
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