अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष में ईरान के सस्ते ड्रोन अमेरिकी रक्षा प्रणालियों पर भारी पड़ रहे हैं। महंगे पैट्रियट मिसाइलों से सस्ते ड्रोनों को मार गिराना पश्चिमी देशों के लिए चुनौती बन गया है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध को शुरू हुए अभी एक हफ्ते भी नहीं हुए हैं और ईरान ने अमेरिका को परेशान कर दिया है। ईरान के सस्ते ड्रोन्स की लहरें अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की रक्षा प्रणालियों पर भारी पड़ रही हैं। बहरीन से लेकर संयुक्त अरब अमीरात तक, हथियारों के भंडार तेजी से खाली हो रहे हैं। इस जंग का नतीजा इस बात पर टिका है कि किसके पास गोला-बारूद पहले खत्म होगा। ईरान के शाहेद-136 ड्रोन्स सोमवार को भी मध्य पूर्व में लक्ष्यों पर हमले करते रहे। हाल के दिनों में इन ड्रोन्स ने अमेरिकी सैन्य अड्डों, तेल ढांचों और आम इमारतों को निशाना बनाया है। यह सब तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान पर क्रूज मिसाइलों, ड्रोन्स और सटीक बमों से हमला किया। अमेरिका के पास हैं महंगे एयर डिफेंस अमेरिका के पैट्रियट एयर-डिफेंस मिसाइलों ने ईरानी शाहेद ड्रोन्स और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में 90 प्रतिशत से ज्यादा सफलता हासिल की है। लेकिन समस्या यह है कि 40 लाख डॉलर की मिसाइल से 20 हजार डॉलर के ड्रोन को मार गिराना पश्चिमी सेनाओं के लिए सिरदर्द बना हुआ है। यूक्रेन युद्ध से ही यह मुश्किल सामने आई थी कि सस्ते हथियार जटिल खतरों के लिए बने संसाधनों को चट कर जाते हैं। नतीजा यह कि ईरान और अमेरिका दोनों के हथियार दिनों या हफ्तों में खत्म हो सकते हैं। जो ज्यादा देर टिकेगा, वही ऊपरी हाथ रखेगा। ईरान के क्षेत्रीय सहयोगी गाजा युद्ध से कमजोर हो चुके हैं और उसकी मिसाइल क्षमता जून के 12-दिवसीय युद्ध में इजराइल-अमेरिका के हमलों से क्षतिग्रस्त हुई। तब से ईरान ने ट्रंप के हमले की चेतावनी दी थी कि इससे पूरा क्षेत्र आग में झुलस जाएगा। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने भी कहा था कि अमेरिकी हमला बड़े संघर्ष को जन्म देगा। ईरान की रणनीति का मिल रहा फायदा? ब्लूमबर्ग न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कतर के पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक मौजूदा इस्तेमाल की रफ्तार से चार दिनों में खत्म हो सकता है। दोहा ने निजी तौर पर संघर्ष को जल्द खत्म करने की अपील की है। हालांकि, कतर के इंटरनेशनल मीडिया ऑफिस ने बयान में कहा कि कतर सेना के पैट्रियट मिसाइलों का भंडार खत्म नहीं हुआ है और अच्छी खासा स्टॉक है। ईरान के पास कितना है हथियारों का जखीरा? ईरान के पास पिछले साल इजरायल से संघर्ष के बाद करीब 2,000 बैलिस्टिक मिसाइलें बची थीं। उसके पास शाहेद ड्रोन्स की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि रूस, जो इनका दूसरा बड़ा उत्पादक है, हर दिन सैकड़ों की रफ्तार से इन्हें बना रहा है। तेहरान ने इस साल के संघर्ष की शुरुआत से अब तक 1,200 से ज्यादा प्रोजेक्टाइल दागे हैं, जिनमें ज्यादातर शाहेद ड्रोन्स हो सकते हैं। इससे लगता है कि वे ज्यादा घातक बैलिस्टिक मिसाइलों को लंबे हमलों के लिए बचा रहे हैं। इजरायल के मंत्री एली कोहेन ने कहा कि अमेरिका-इजराइल अभियान ने ईरान को सैकड़ों मिसाइलों और ड्रोन्स लॉन्च करने से रोका। इजरायल ने बताया कि सोमवार तक उसने करीब 150 मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए। क्या है इजरायल की स्ट्रैटजी? ईरान की सेना बिना नागरिक नेतृत्व से करीबी समन्वय के काम कर रही है, जिसमें विदेश मंत्रालय भी शामिल है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा है कि हमारी सैन्य इकाइयां अब स्वतंत्र हैं और अलग-थलग हैं। वे पहले दिए गए सामान्य निर्देशों पर काम कर रही हैं। अराघची खुद इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर के पूर्व सदस्य हैं। लेकिन इजरायल पूरी तरह से लंबे जंग के लिए तैयार हो रहा है। इजरायल को गाजा युद्ध में लंबे समय तक युद्ध करने का हालिया अनुभव है और ईरान के साथ लड़ने के लिए उसे अमेरिका का साथ भी है। यह भी पढ़ें- खामेनेई के बेटे मोजतबा को चुना गया ईरान का सुप्रीम लीडर, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने लगाई मुहर.
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध को शुरू हुए अभी एक हफ्ते भी नहीं हुए हैं और ईरान ने अमेरिका को परेशान कर दिया है। ईरान के सस्ते ड्रोन्स की लहरें अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की रक्षा प्रणालियों पर भारी पड़ रही हैं। बहरीन से लेकर संयुक्त अरब अमीरात तक, हथियारों के भंडार तेजी से खाली हो रहे हैं। इस जंग का नतीजा इस बात पर टिका है कि किसके पास गोला-बारूद पहले खत्म होगा। ईरान के शाहेद-136 ड्रोन्स सोमवार को भी मध्य पूर्व में लक्ष्यों पर हमले करते रहे। हाल के दिनों में इन ड्रोन्स ने अमेरिकी सैन्य अड्डों, तेल ढांचों और आम इमारतों को निशाना बनाया है। यह सब तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान पर क्रूज मिसाइलों, ड्रोन्स और सटीक बमों से हमला किया। अमेरिका के पास हैं महंगे एयर डिफेंस अमेरिका के पैट्रियट एयर-डिफेंस मिसाइलों ने ईरानी शाहेद ड्रोन्स और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में 90 प्रतिशत से ज्यादा सफलता हासिल की है। लेकिन समस्या यह है कि 40 लाख डॉलर की मिसाइल से 20 हजार डॉलर के ड्रोन को मार गिराना पश्चिमी सेनाओं के लिए सिरदर्द बना हुआ है। यूक्रेन युद्ध से ही यह मुश्किल सामने आई थी कि सस्ते हथियार जटिल खतरों के लिए बने संसाधनों को चट कर जाते हैं। नतीजा यह कि ईरान और अमेरिका दोनों के हथियार दिनों या हफ्तों में खत्म हो सकते हैं। जो ज्यादा देर टिकेगा, वही ऊपरी हाथ रखेगा। ईरान के क्षेत्रीय सहयोगी गाजा युद्ध से कमजोर हो चुके हैं और उसकी मिसाइल क्षमता जून के 12-दिवसीय युद्ध में इजराइल-अमेरिका के हमलों से क्षतिग्रस्त हुई। तब से ईरान ने ट्रंप के हमले की चेतावनी दी थी कि इससे पूरा क्षेत्र आग में झुलस जाएगा। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने भी कहा था कि अमेरिकी हमला बड़े संघर्ष को जन्म देगा। ईरान की रणनीति का मिल रहा फायदा? ब्लूमबर्ग न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कतर के पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक मौजूदा इस्तेमाल की रफ्तार से चार दिनों में खत्म हो सकता है। दोहा ने निजी तौर पर संघर्ष को जल्द खत्म करने की अपील की है। हालांकि, कतर के इंटरनेशनल मीडिया ऑफिस ने बयान में कहा कि कतर सेना के पैट्रियट मिसाइलों का भंडार खत्म नहीं हुआ है और अच्छी खासा स्टॉक है। ईरान के पास कितना है हथियारों का जखीरा? ईरान के पास पिछले साल इजरायल से संघर्ष के बाद करीब 2,000 बैलिस्टिक मिसाइलें बची थीं। उसके पास शाहेद ड्रोन्स की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि रूस, जो इनका दूसरा बड़ा उत्पादक है, हर दिन सैकड़ों की रफ्तार से इन्हें बना रहा है। तेहरान ने इस साल के संघर्ष की शुरुआत से अब तक 1,200 से ज्यादा प्रोजेक्टाइल दागे हैं, जिनमें ज्यादातर शाहेद ड्रोन्स हो सकते हैं। इससे लगता है कि वे ज्यादा घातक बैलिस्टिक मिसाइलों को लंबे हमलों के लिए बचा रहे हैं। इजरायल के मंत्री एली कोहेन ने कहा कि अमेरिका-इजराइल अभियान ने ईरान को सैकड़ों मिसाइलों और ड्रोन्स लॉन्च करने से रोका। इजरायल ने बताया कि सोमवार तक उसने करीब 150 मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए। क्या है इजरायल की स्ट्रैटजी? ईरान की सेना बिना नागरिक नेतृत्व से करीबी समन्वय के काम कर रही है, जिसमें विदेश मंत्रालय भी शामिल है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा है कि हमारी सैन्य इकाइयां अब स्वतंत्र हैं और अलग-थलग हैं। वे पहले दिए गए सामान्य निर्देशों पर काम कर रही हैं। अराघची खुद इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर के पूर्व सदस्य हैं। लेकिन इजरायल पूरी तरह से लंबे जंग के लिए तैयार हो रहा है। इजरायल को गाजा युद्ध में लंबे समय तक युद्ध करने का हालिया अनुभव है और ईरान के साथ लड़ने के लिए उसे अमेरिका का साथ भी है। यह भी पढ़ें- खामेनेई के बेटे मोजतबा को चुना गया ईरान का सुप्रीम लीडर, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने लगाई मुहर
US Defense Israel Conflict Shahed-136 Patriot Missiles Middle East War Military Strategy Drone Warfare US-Iran Tensions Defense Systems
