Magh Mela Shankaracharya Avimukteshwaranand Swami Security Protocols: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब शंकराचार्य की ओर से कल्पवासी थाना अध्यक्ष को एक तहरीर दी गई है, जिसमें उन्होंने अपनी जान को खतरा होने की बात कही...
उनके गुरु को मिली थी Y+, सेफ्टी के मामले में पुरी गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य नंबर-1'प्रशासन के जिम्मे पूरा मेला है। अगर इस तरह की कोई घटना होती है, तो वही जिम्मेदार होगा। हमारी कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। हम भगवान भरोसे बैठे हैं।'यह बात प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कही। वो 10 दिन से धरने पर बैठे हैं। शिविर में हंगामे के बाद अब शंकराचार्य की ओर से कल्पवासी थाना अध्यक्ष को एक तहरीर दी गई है। इसमें उन्होंने अपनी जान को खतरा होने की बात कही है। सुरक्षा के लिए 12 सीसीटीवी लगाए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को कौन-सी सुरक्षा मिली है? बाकी 3 शंकराचार्य के पास किस कैटेगरी की सुरक्षा है? सबसे ज्यादा तगड़ी सिक्योरिटी किसकी है? आइए जानते हैं…अविमुक्तेश्वरानंद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार के मुताबिक, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा थी। उन्हें यह सुरक्षा मध्यप्रदेश सरकार ने दी थी। स्वरूपानंद जी ज्योतिष्पीठ और द्वारका पीठ के शंकराचार्य थे। उनके दो प्रमुख शिष्य थे- सदानंद सरस्वती और अविमुक्तेश्वरानंद। शंकराचार्य स्वरूपानंद के सितंबर 2022 में निधन के बाद उत्तराधिकारी के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिष्पीठ और स्वामी सदानंद सरस्वती को द्वारका पीठ की जिम्मेदारी दी गई। ऐसे में दोनों को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, लेकिन उनकी सुरक्षा को दो हिस्सों में बांट दिया गया। उन्हें केवल नॉर्मल वाई श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। इसमें उन्हें मध्यप्रदेश पुलिस ने दो पीएसओ उपलब्ध कराए हैं।शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ कुल दो सरकारी PSO तैनात रहते हैं। उनके साथ एक पीएसओ हर समय होता है, जिसके पास गन होती है। इसके अलावा अविमुक्तेश्वरानंद के साथ परिकर रहते हैं। शंकराचार्य दंड रखते हैं। लेकिन, कोई हथियार या अन्य सुरक्षा उपकरण उनके पास नहीं होता। योगीराज सरकार के अनुसार, 18 जनवरी को पीएसओ तक को धक्का दिया गया।योगीराज सरकार के मुताबिक, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को 24 घंटे सुरक्षा दी गई है। जब शंकराचार्य किसी दूसरे प्रदेश में यात्रा पर जाते हैं, तो कई बार वहां प्रशासन सुरक्षा बढ़ा देता है। कुछ जिलों में एस्कॉर्ट भी बढ़ा दिया जाता है। हालांकि, योगीराज सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि काशी में डीएम की ओर से कोई सुरक्षा नहीं दी जाती, जबकि लखनऊ में उन्हें पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है।सवाल: क्या उनके लिए रूट चार्ट और ट्रैफिक मैनेजमेंट लागू किया जाता है?अविमुक्तेश्वरानंद के लिए रूट चार्ट और ट्रैफिक मैनेजमेंट की व्यवस्था रहती है। सरकारी पीएसओ लगातार संपर्क में रहता है। साथ ही मेला प्रशासन की ओर से पहले भी सुरक्षा व्यवस्था और एस्कॉर्ट उपलब्ध कराया जाता रहा है। लेकिन, इस बार ऐसा नहीं हुआ। योगीराज सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए महाराज जी की सुरक्षा और बढ़ाई जानी चाहिए। मुझे यूपी सरकार से कोई उम्मीद नहीं है। इसलिए मैं केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से मांग करता हूं कि शंकराचार्य की सुरक्षा बढ़ाई जाए। जिस तरह से उनके साथ ये हादसा हुआ, उससे ये साबित होता है कि उनकी हत्या करने की साजिश थी। इसलिए महाराज जी की सुरक्षा बढ़ानी जरूरी है। शंकराचार्य को मजबूत सुरक्षा घेरे में रखना जरूरी है, जिससे किसी भी तरह की अनहोनी या बड़ा हादसा न हो। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी जान का खतरा बताया है। उनके प्रवक्ता ने गृह मंत्रालय से सुरक्षा की मांग की है।सबसे तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था पुरी गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की है। उन्हें ओडिशा सरकार ने उच्चस्तरीय जेड प्लस श्रेणी सुरक्षा दी है। दूसरे नंबर पर कांची कामकोटि पीठ के 70वें शंकराचार्य श्री विजयेंद्र सरस्वती का नाम है। उन्हें केंद्र सरकार की तरफ से जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। यह निर्णय खुफिया जानकारी और सुरक्षा संबंधी इनपुट के बाद लिया गया था। इसके बाद उन्हें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों द्वारा सुरक्षा कवर दिया जा रहा। द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती को भी अविमुक्तेश्वरानंद की तरह वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली है।शंकराचार्यों की सुरक्षा के लिए कोई अलग या विशेष नियम तय नहीं है। उन्हें भी सुरक्षा व्यवस्था खतरे के आकलन के आधार पर ही दी जाती है। सुरक्षा कैटगरी तय करने का फैसला राज्य पुलिस, खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट और गृह विभाग की समीक्षा के बाद किया जाता है। जरूरत बढ़ने पर सुरक्षा बढ़ाई जाती है और खतरा कम होने पर घटाई भी जा सकती है।Z+ सुरक्षा भारत में सबसे उच्चस्तर की राष्ट्रीय सुरक्षा श्रेणी होती है। यह आमतौर पर राजनीतिक या धार्मिक नेताओं को तब दी जाती है, जब खतरे का साफ और गंभीर आकलन किया गया हो। संतों को सुरक्षा देने का फैसला उनके पद या प्रतिष्ठा के आधार पर नहीं, खतरे को देखते हुए किया जाता है। किसको कौन-सी सुरक्षा देनी है, यह सरकार या कोर्ट तय करती है।फिलहाल भारत में यह सुरक्षा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, सोनिया गांधी, फारूक अब्दुल्ला, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.
मोहन यादव और उद्योगपति मुकेश अंबानी को भी यह सुरक्षा मिली हुई है। मुकेश अंबानी इस सुरक्षा दल का खर्च खुद उठाते हैं।जिस चोटी को पकड़कर प्रयागराज पुलिस ने पीटा...उसका महत्व क्या, शास्त्रों में गाय के खुर के बराबर रखने की परंपरा मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से कथित बदसलूकी और मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शिष्यों का आरोप है कि पुलिस ने न सिर्फ शंकराचार्य का राजदंड छीना, बल्कि कुछ बटुकों को शिखा पकड़कर घसीटा। उन्हें कमरे में बंद किया और मारपीट की।ग्वालियर में कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर युवती से रेपहिमाचल में फिर भारी बर्फबारी, भरमौर में ग्लेशियर गिराचंडीगढ़-मोहाली में घनी धुंध, 3 जिलों में बारिश का अलर्टउत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी, मसूरी पहुंचे 1 लाख सैलानीश्रीगंगानगर जिले में 31 को बारिश की संभावनायमुनानगर में खेतों में घुसा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का पानी
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