ईरानी दूतावास की आपत्ति को एक सेकंड के लिए साइड रखते हुए भारतीय मीडिया को सोचना चाहिए कि भारत और ईरान के बीच के संबंध ऐतिहासिक रहे हैं। और किसी भी देश के नेता की आलोचना जायज है, लेकिन सीमा रेखा का उल्लंघन करना गलत है। ईरान ने भारतीय मीडिया पर सवाल उठाए...
तेहरान: ईरान भारत का दोस्त रहा है और पाकिस्तान को दरकिनार कर भारत को अफगानिस्तान के रास्ते मध्य एशिया में कारोबार के लिए रास्ता देता है। ईरान भारत का सालों से सहयोगी रहा है, लेकिन भारतीय मीडिया के कुछ वर्ग की तरफ से ईरान के सुप्रीम लीडर को लेकर कही गई कुछ बातें दोनों देशों के बीच दरार पैदा कर रही हैं। भारतीय मीडिया में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को लेकर कुछ ऐसी बातें कही गईं हैं, जिसे दिल्ली में ईरानी दूतावास ने आपत्तिजनक बताया है और उसकी कड़ी आलोचना की है। दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि 'भारतीय मीडिया को फर्जी और मनगढ़ंत खबरें फैलाकर जनता के विश्वास और अपनी प्रोफेशनल विश्वसनीयता से समझौता नहीं करना चाहिए।'ईरानी दूतावास ने लिखा है कि 'हाल के दिनों में, यह देखा गया है कि कुछ प्रसिद्ध मीडिया संस्थानों सहित कुछ भारतीय समाचार माध्यमों ने ईरान और उसके महान नेतृत्व का अनादर करते हुए निराधार रिपोर्टें प्रकाशित की हैं। ऐसी गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग न सिर्फ जनता के विश्वास को कम करती है, बल्कि दर्शकों के बीच इन मीडिया संस्थानों की पेशेवर प्रतिष्ठा को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाती हैं।'भारतीय मीडिया में रिपोर्टिंग से भड़का ईरानईरानी दूतावास की आपत्ति को एक सेकंड के लिए साइड रखते हुए भारतीय मीडिया को सोचना चाहिए कि भारत और ईरान के बीच के संबंध ऐतिहासिक रहे हैं। और किसी भी देश के नेता की आलोचना जायज है, लेकिन सीमा रेखा का उल्लंघन करना गलत है। आलोचना और अपमान के बीच के अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है, क्योंकि ये दो देशों के बीच के महत्वपूर्ण रिश्ते की बात है। ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि 'यद्यपि दूतावास अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनता के सूचना प्राप्त करने के अधिकार का पूरा सम्मान करता है, वह भारतीय मीडिया से विश्वसनीय और निष्पक्ष स्रोतों पर भरोसा करने और ईरान के बारे में सनसनीखेज और गलत सामग्री फैलाने से बचने का पुरजोर आग्रह करता है।'माना जा रहा है कि भारतीय मीडिया में कुछ जगहों पर मोसाद के हवाले से ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई को लेकर खबर प्रकाशित की गई। इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद से संबंधित एक सोशल मीडिया हैंडल पर ईरानी सुप्रीम लीडर को 'नशे की लत में शिकार' शख्स करार दिया था। जिसको लेकर ईरान ने गहरी आपत्ति जताई है। ईरान ने इस अकाउंट को प्रोपेगेंडा फैलाना वाला अकाउंट बताया है। आपको बता दें कि भारत के लिए ईरान और इजरायल, दोनों ही महत्वपूर्ण साझेदार, दोस्त और गहरे रिश्ते वाले देश हैं। इसलिए ईरान और इजरायल के बीच हालिया संघर्ष के दौरान भी भारत ने संतुलित रूख अपनाया था। लेकिन मीडिया में रिपोर्टिंग करते हुए कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए कि मीडिया में लिखी गई बातों का आम जनता की सोच पर असर होता है और इस तरह की अपमानजनक रिपोर्टिंग से ईरान के लोगों में भारत को लेकर नकारात्मक बातें भड़क सकती हैं और भारत सरकार की नीति में 'लोगों से लोगों के बीच का रिश्ता' बनाना सबसे महत्वपूर्ण रहा है। इसलिए जिम्मेदारी से दो देशों के बीच के संबंध और उनके नेताओं के बारे में लिखना चाहिए।.
तेहरान: ईरान भारत का दोस्त रहा है और पाकिस्तान को दरकिनार कर भारत को अफगानिस्तान के रास्ते मध्य एशिया में कारोबार के लिए रास्ता देता है। ईरान भारत का सालों से सहयोगी रहा है, लेकिन भारतीय मीडिया के कुछ वर्ग की तरफ से ईरान के सुप्रीम लीडर को लेकर कही गई कुछ बातें दोनों देशों के बीच दरार पैदा कर रही हैं। भारतीय मीडिया में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को लेकर कुछ ऐसी बातें कही गईं हैं, जिसे दिल्ली में ईरानी दूतावास ने आपत्तिजनक बताया है और उसकी कड़ी आलोचना की है। दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि 'भारतीय मीडिया को फर्जी और मनगढ़ंत खबरें फैलाकर जनता के विश्वास और अपनी प्रोफेशनल विश्वसनीयता से समझौता नहीं करना चाहिए।'ईरानी दूतावास ने लिखा है कि 'हाल के दिनों में, यह देखा गया है कि कुछ प्रसिद्ध मीडिया संस्थानों सहित कुछ भारतीय समाचार माध्यमों ने ईरान और उसके महान नेतृत्व का अनादर करते हुए निराधार रिपोर्टें प्रकाशित की हैं। ऐसी गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग न सिर्फ जनता के विश्वास को कम करती है, बल्कि दर्शकों के बीच इन मीडिया संस्थानों की पेशेवर प्रतिष्ठा को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाती हैं।'भारतीय मीडिया में रिपोर्टिंग से भड़का ईरानईरानी दूतावास की आपत्ति को एक सेकंड के लिए साइड रखते हुए भारतीय मीडिया को सोचना चाहिए कि भारत और ईरान के बीच के संबंध ऐतिहासिक रहे हैं। और किसी भी देश के नेता की आलोचना जायज है, लेकिन सीमा रेखा का उल्लंघन करना गलत है। आलोचना और अपमान के बीच के अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है, क्योंकि ये दो देशों के बीच के महत्वपूर्ण रिश्ते की बात है। ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि 'यद्यपि दूतावास अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनता के सूचना प्राप्त करने के अधिकार का पूरा सम्मान करता है, वह भारतीय मीडिया से विश्वसनीय और निष्पक्ष स्रोतों पर भरोसा करने और ईरान के बारे में सनसनीखेज और गलत सामग्री फैलाने से बचने का पुरजोर आग्रह करता है।'माना जा रहा है कि भारतीय मीडिया में कुछ जगहों पर मोसाद के हवाले से ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई को लेकर खबर प्रकाशित की गई। इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद से संबंधित एक सोशल मीडिया हैंडल पर ईरानी सुप्रीम लीडर को 'नशे की लत में शिकार' शख्स करार दिया था। जिसको लेकर ईरान ने गहरी आपत्ति जताई है। ईरान ने इस अकाउंट को प्रोपेगेंडा फैलाना वाला अकाउंट बताया है। आपको बता दें कि भारत के लिए ईरान और इजरायल, दोनों ही महत्वपूर्ण साझेदार, दोस्त और गहरे रिश्ते वाले देश हैं। इसलिए ईरान और इजरायल के बीच हालिया संघर्ष के दौरान भी भारत ने संतुलित रूख अपनाया था। लेकिन मीडिया में रिपोर्टिंग करते हुए कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए कि मीडिया में लिखी गई बातों का आम जनता की सोच पर असर होता है और इस तरह की अपमानजनक रिपोर्टिंग से ईरान के लोगों में भारत को लेकर नकारात्मक बातें भड़क सकती हैं और भारत सरकार की नीति में 'लोगों से लोगों के बीच का रिश्ता' बनाना सबसे महत्वपूर्ण रहा है। इसलिए जिम्मेदारी से दो देशों के बीच के संबंध और उनके नेताओं के बारे में लिखना चाहिए।
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