अमेरिकी F-35 , हाइपरसोनिक मिसाइल, सैटेलाइट... रूस के नए S-500 सिस्‍टम के आगे सब फेल, क्या भारत भी लेगा ब्रह्मास्त्र?

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अमेरिकी F-35 , हाइपरसोनिक मिसाइल, सैटेलाइट... रूस के नए S-500 सिस्‍टम के आगे सब फेल, क्या भारत भी लेगा ब्रह्मास्त्र?
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S 500 Air Defense System News: रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने पश्चिमी देशों की टेंशन को काफी बढ़ा दिया है। भारत ने रूस से एस-400 एयर डिफेंस खरीदा था और एस-500 उसी का नेक्स्ट वैरिएंट हैं। ये अत्याधुनिक एयर डिफेंस है, जिसमें लोअर ऑर्बिट सैटेलाइट्स तक को मार गिराने की क्षमता है। रूस ने भारत को भी एस-500 का ऑफर दिया...

मॉस्को: भारत ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा है। जिसे भारत ने चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर तैनात किया है। ये एक खतरनाक एयरडिफेंस सिस्टम है, जिसमें फाइटर जेट्स और मिसाइलों को ट्रैक करने और मार गिराने की क्षमता है। लेकिन रूस ने S-500 एयर डिफेंस सिस्टम भी तैयार कर लिया है। इस एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर रूसी डिफेंस एक्सपर्ट मिखाइल खोदारेनोक ने दावा किया है कि ये हाइपरसोनिक मिसाइलों को ट्रैक करने और मार गिराने में सक्षम है। दावा किया गया है कि इस एयर डिफेंस सिस्टम से पश्चिमी देशों की तरफ से विकसित किए गये तमाम मिसाइलों को मार गिराने की ताकत है। रूस के इस ब्रह्मास्त्र ने यूरोपीय देशों को बेचैन कर दिया है। S-500 एयर डिफेंस सिस्टम को 55R6M ट्रायम्फेटर-एम के नाम से भी जाना जाता है, जिसे रूस ने 2025 में क्रीमिया ब्रिज की रक्षा करने के लिए तैनात किया है। क्रीमिया ब्रिज लगातार खतरे में रहा है और अगर ये ब्रिज टूटता है, तो रूस का क्रीमिया से संपर्क टूट जाएगा, जो रणनीतिक तौर पर रूस के लिए काफी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस अभी तक 12 एस-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को यूक्रेन युद्ध में तैनात कर चुका है। इसके अलावा इस डिफेंस सिस्टम का तेजी से उत्पादन किया जा रहा है। कितना ताकतवर है S-500 एयर डिफेंस सिस्टम?रूस की नई S-500 ट्रायम्फेटर-एम एयर डिफेंस सिस्टम को हवाई खतरों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। ये S-400 का नेक्स्ट वैरिएंट है। S-500 एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर रूस का दावा रहा है कि ये स्टील्थ फाइटर जेट्स को भी ट्रैक करने में सक्षम है। स्टील्थ फाइटर विमानों की सबसे बड़ी क्वालिटी ही यही है कि ये किसी रडार सिस्टम से ट्रैक नहीं हो सकता है। लेकिन एस-500 के आगे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की परीक्षा हो सकती है। इसके अलावा इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल , हाइपरसोनिक मिसाइल और यहां तक की लोअर ऑर्बिट सैटेलाइट्स को भी मार गिराने की क्षमता रूस के इस एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम में है।कई पश्चिमी देश रूस के ओरेशनिक मिसाइल की क्षमता वाली हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम विकसित कर रहे हैं। अमेरिका भी कई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है, जिसमें लॉन्ग-रेंज हाइपरसोनिक वेपन शामिल है, जिसे 'डार्क ईगल' के रूप में भी जाना जाता है। इसकी क्षमता करीब 2776 किलोमीटर है। यानि इस रेंज तक ये सतह से सतह पर मार करने वाला बूस्ट-ग्लाइड हथियार है। इसके अलावा फ्रांस ASN4G विकसित कर रहा है, जो एक परमाणु-सशस्त्र, हवा से लॉन्च की जाने वाली हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो 2035 तक ASMPA मिसाइल की जगह ले लेगी। लॉकहीड मार्टिन माको हाइपरसोनिक मिसाइल पर भी काम कर रहा है, जिसका उपयोग एफ-35 और एफ-22 जैसे आधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमानों के साथ किया जाएगा।यानि दुनिया में नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर जेट्स, मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस सिस्टम का तेजी से निर्माण हो रहा है, जिनमें अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। दुनिया के देश ना सिर्फ हमला करने की क्षमता को अत्याधुनिक कर रहे हैं, बल्कि रक्षात्मक क्षमता को भी तेजी से बढ़ा रहा है। लिहाजा सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत रूस से एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदेगा। रूस कई बार इशारों में भारत को ऑफर कर चुका है। भविष्य में अगर भारत एस-500 को खरीदने का फैसला करे तो हैरानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि भारत पहले से ही एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है।रूस का नया 'ब्रह्मास्‍त्र' S-500, अंतरिक्ष तक करेगा हमलाS-500 एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता क्या है?रूस ने पश्चिमी देशों के हाई-टेक्नोलॉजी हथियारों से मुकाबला करने के लिए एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम को बनाया है, जिसमें स्टील्थ फाइटर जेट्स, इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल , हाइपरसोनिक मिसाइल और लोअर ऑर्बिट सैटेलाइट्स को मार गिराने की क्षमता है। इस डिफेंस सिस्टम का ऑपरेशनल रेंज 600 किलोमीटर है, जबकि ये 200 किलोमीटर ऊंचाई तक क्षमता हासिल करता है। ऑपरेशनल रेंज में इसने एस-300 और एस-400 को पीछे छोड़ दिया है। दुश्मनों के खतरों को खत्म करने के लिए ये S-500 77N6-N और 77N6-N1 मिसाइलों का इस्तेमाल करता है और ये हाइपरसोनिक स्पीड के साथ हमला करता है। लिहाजा पश्चिमी देश इसे काफी खतरनाक मानते हैं। रूस अपने इस एयर डिफेंस सिस्टम से नाटो की सर्विलांस और कम्युनिकेशन सिस्टम को ध्वस्त कर सकता है। रूस ने भारत के साथ S-500 के ज्वाइंट प्रोडक्शन का ऑफर दिया है, लेकिन भारत ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है।.

मॉस्को: भारत ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा है। जिसे भारत ने चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर तैनात किया है। ये एक खतरनाक एयरडिफेंस सिस्टम है, जिसमें फाइटर जेट्स और मिसाइलों को ट्रैक करने और मार गिराने की क्षमता है। लेकिन रूस ने S-500 एयर डिफेंस सिस्टम भी तैयार कर लिया है। इस एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर रूसी डिफेंस एक्सपर्ट मिखाइल खोदारेनोक ने दावा किया है कि ये हाइपरसोनिक मिसाइलों को ट्रैक करने और मार गिराने में सक्षम है। दावा किया गया है कि इस एयर डिफेंस सिस्टम से पश्चिमी देशों की तरफ से विकसित किए गये तमाम मिसाइलों को मार गिराने की ताकत है। रूस के इस ब्रह्मास्त्र ने यूरोपीय देशों को बेचैन कर दिया है। S-500 एयर डिफेंस सिस्टम को 55R6M ट्रायम्फेटर-एम के नाम से भी जाना जाता है, जिसे रूस ने 2025 में क्रीमिया ब्रिज की रक्षा करने के लिए तैनात किया है। क्रीमिया ब्रिज लगातार खतरे में रहा है और अगर ये ब्रिज टूटता है, तो रूस का क्रीमिया से संपर्क टूट जाएगा, जो रणनीतिक तौर पर रूस के लिए काफी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस अभी तक 12 एस-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को यूक्रेन युद्ध में तैनात कर चुका है। इसके अलावा इस डिफेंस सिस्टम का तेजी से उत्पादन किया जा रहा है। कितना ताकतवर है S-500 एयर डिफेंस सिस्टम?रूस की नई S-500 ट्रायम्फेटर-एम एयर डिफेंस सिस्टम को हवाई खतरों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। ये S-400 का नेक्स्ट वैरिएंट है। S-500 एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर रूस का दावा रहा है कि ये स्टील्थ फाइटर जेट्स को भी ट्रैक करने में सक्षम है। स्टील्थ फाइटर विमानों की सबसे बड़ी क्वालिटी ही यही है कि ये किसी रडार सिस्टम से ट्रैक नहीं हो सकता है। लेकिन एस-500 के आगे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की परीक्षा हो सकती है। इसके अलावा इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल , हाइपरसोनिक मिसाइल और यहां तक की लोअर ऑर्बिट सैटेलाइट्स को भी मार गिराने की क्षमता रूस के इस एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम में है।कई पश्चिमी देश रूस के ओरेशनिक मिसाइल की क्षमता वाली हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम विकसित कर रहे हैं। अमेरिका भी कई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है, जिसमें लॉन्ग-रेंज हाइपरसोनिक वेपन शामिल है, जिसे 'डार्क ईगल' के रूप में भी जाना जाता है। इसकी क्षमता करीब 2776 किलोमीटर है। यानि इस रेंज तक ये सतह से सतह पर मार करने वाला बूस्ट-ग्लाइड हथियार है। इसके अलावा फ्रांस ASN4G विकसित कर रहा है, जो एक परमाणु-सशस्त्र, हवा से लॉन्च की जाने वाली हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो 2035 तक ASMPA मिसाइल की जगह ले लेगी। लॉकहीड मार्टिन माको हाइपरसोनिक मिसाइल पर भी काम कर रहा है, जिसका उपयोग एफ-35 और एफ-22 जैसे आधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमानों के साथ किया जाएगा।यानि दुनिया में नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर जेट्स, मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस सिस्टम का तेजी से निर्माण हो रहा है, जिनमें अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। दुनिया के देश ना सिर्फ हमला करने की क्षमता को अत्याधुनिक कर रहे हैं, बल्कि रक्षात्मक क्षमता को भी तेजी से बढ़ा रहा है। लिहाजा सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत रूस से एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदेगा। रूस कई बार इशारों में भारत को ऑफर कर चुका है। भविष्य में अगर भारत एस-500 को खरीदने का फैसला करे तो हैरानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि भारत पहले से ही एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है।रूस का नया 'ब्रह्मास्‍त्र' S-500, अंतरिक्ष तक करेगा हमलाS-500 एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता क्या है?रूस ने पश्चिमी देशों के हाई-टेक्नोलॉजी हथियारों से मुकाबला करने के लिए एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम को बनाया है, जिसमें स्टील्थ फाइटर जेट्स, इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल , हाइपरसोनिक मिसाइल और लोअर ऑर्बिट सैटेलाइट्स को मार गिराने की क्षमता है। इस डिफेंस सिस्टम का ऑपरेशनल रेंज 600 किलोमीटर है, जबकि ये 200 किलोमीटर ऊंचाई तक क्षमता हासिल करता है। ऑपरेशनल रेंज में इसने एस-300 और एस-400 को पीछे छोड़ दिया है। दुश्मनों के खतरों को खत्म करने के लिए ये S-500 77N6-N और 77N6-N1 मिसाइलों का इस्तेमाल करता है और ये हाइपरसोनिक स्पीड के साथ हमला करता है। लिहाजा पश्चिमी देश इसे काफी खतरनाक मानते हैं। रूस अपने इस एयर डिफेंस सिस्टम से नाटो की सर्विलांस और कम्युनिकेशन सिस्टम को ध्वस्त कर सकता है। रूस ने भारत के साथ S-500 के ज्वाइंट प्रोडक्शन का ऑफर दिया है, लेकिन भारत ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है।

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