अमेरिकी प्रतिबंध का निकला तोड़, भारत और रूस में नए पेमेंट सिस्टम पर सहमति via NavbharatTimes
रूस के साथ भारत अपने पुराने रक्षा संबंधों को खत्म नहीं करना चाहताअरबों डॉलर की डील के लिए दोनों देश अपनी मुद्राओं में लेनदेन करेंगेअरबों डॉलर के रक्षा सौदे के लिए भारत और रूस अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं के जरिए भुगतान की एक नई प्रणाली पर सहमत हो गए हैं। दरअसल, प्रतिबंधों और बैंकिंग पाबंदियों को लेकर अमेरिका की धमकी से पैदा हुए जोखिम को टालने के लिए दोनों देशों ने यह बड़ा कदम उठाया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इस व्यवस्था से भारत अब 2 युद्धपोतों के लिए पहली किस्त जल्द दे सकेगा। गौरतलब है कि रूस भारतीय नौसेना के लिए जंगी जहाज बना रहा है। नई दिल्ली में मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने इसकी जानकारी दी। हालांकि इससे ज्यादा उन्होंने कुछ नहीं बताया।नई व्यवस्था की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने मॉस्को में बताया कि रूस और भारत के सेंट्रल बैंकों के बीच बने पेमेंट अग्रीमेंट के तहत डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट रूबल और रुपये में फाइनल किए जाएंगे। दरअसल, 2017 में रूस के सरकारी हथियार निर्यातक रोसोबोरान एक्सपोर्ट पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया था तब भारतीय स्टेट बैंक को हथियारों की खरीद के लिए रूस को भुगतान रोकना पड़ा। अब नई व्यवस्था के तहत कॉन्ट्रैक्ट पेमेंट्स में अरबों डॉलर रूस को मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।दरअसल, रूस को अपने स्ट्रैटिजिक डिफेंस सेक्टर से सेल्स को कायम रखने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है। पिछले साल यह 19 अरब डॉलर रहा। इसके पीछेभी जिम्मेदार हैं जिसने हर उस देश को धमकी दे रखी है, जो रूसी हथियार खरीदते हैं या प्लान कर रहे हैं। अमेरिका एक बार ही सही चीन के खिलाफ भी इसे लागू कर चुका है। ऐसे में अपने निर्यात कारोबार को लेकर रूस की चिंता बढ़ी है।अमेरिका के बाद रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश है। 2014 से लेकर 2018 तक रूस के विदेशी हथियारों की डील्स में 17 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट के मुताबिक इस दौरान भारत और वेनेजुएला ने भी हथियारों की खरीद कम की।भारत की अमेरिका के साथ पार्टनरशिप अभी बढ़ी है जबकि रूस के साथ शीत युद्ध के समय से ही सामरिक संबंध रहे हैं। अब अमेरिका दबाव बना रहा है कि भारत रूस के साथ आधुनिक S-400सिस्टम्स खरीदने के 5 अरब डॉलर की डील को रद्द कर दे। उसने कड़ा कदम उठाने की चेतावनी भी दी है। फिलहाल भारत अपने हथियारों की खरीद को लेकर अमेरिका से छूट हासिल करने की कोशिश कर रहा है।खरीदा है, जिसकी डिलिवरी शुक्रवार से शुरू भी हो गई। कई तस्वीरें भी मीडिया में आईं हैं, जिसमें रूस के प्लेन से अंकारा में पहली खेप उतारी जाती दिखती है। भारत को S-400 की डिलिवरी 2020 के बाद होनी है। अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे से सुरक्षा देने के लिए सरकार के नियंत्रण वाले एक रूसी कर्जदाता को डिफेंस इंडस्ट्री को फाइनैंस करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह कर्जदाता भारतीय लेनदेन में भी अहम भूमिका निभाएगा।india, russia have agreed on new payment method to avoid risks by american threat.
रूस के साथ भारत अपने पुराने रक्षा संबंधों को खत्म नहीं करना चाहताअरबों डॉलर की डील के लिए दोनों देश अपनी मुद्राओं में लेनदेन करेंगेअरबों डॉलर के रक्षा सौदे के लिए भारत और रूस अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं के जरिए भुगतान की एक नई प्रणाली पर सहमत हो गए हैं। दरअसल, प्रतिबंधों और बैंकिंग पाबंदियों को लेकर अमेरिका की धमकी से पैदा हुए जोखिम को टालने के लिए दोनों देशों ने यह बड़ा कदम उठाया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इस व्यवस्था से भारत अब 2 युद्धपोतों के लिए पहली किस्त जल्द दे सकेगा। गौरतलब है कि रूस भारतीय नौसेना के लिए जंगी जहाज बना रहा है। नई दिल्ली में मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने इसकी जानकारी दी। हालांकि इससे ज्यादा उन्होंने कुछ नहीं बताया।नई व्यवस्था की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने मॉस्को में बताया कि रूस और भारत के सेंट्रल बैंकों के बीच बने पेमेंट अग्रीमेंट के तहत डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट रूबल और रुपये में फाइनल किए जाएंगे। दरअसल, 2017 में रूस के सरकारी हथियार निर्यातक रोसोबोरान एक्सपोर्ट पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया था तब भारतीय स्टेट बैंक को हथियारों की खरीद के लिए रूस को भुगतान रोकना पड़ा। अब नई व्यवस्था के तहत कॉन्ट्रैक्ट पेमेंट्स में अरबों डॉलर रूस को मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।दरअसल, रूस को अपने स्ट्रैटिजिक डिफेंस सेक्टर से सेल्स को कायम रखने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है। पिछले साल यह 19 अरब डॉलर रहा। इसके पीछेभी जिम्मेदार हैं जिसने हर उस देश को धमकी दे रखी है, जो रूसी हथियार खरीदते हैं या प्लान कर रहे हैं। अमेरिका एक बार ही सही चीन के खिलाफ भी इसे लागू कर चुका है। ऐसे में अपने निर्यात कारोबार को लेकर रूस की चिंता बढ़ी है।अमेरिका के बाद रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश है। 2014 से लेकर 2018 तक रूस के विदेशी हथियारों की डील्स में 17 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट के मुताबिक इस दौरान भारत और वेनेजुएला ने भी हथियारों की खरीद कम की।भारत की अमेरिका के साथ पार्टनरशिप अभी बढ़ी है जबकि रूस के साथ शीत युद्ध के समय से ही सामरिक संबंध रहे हैं। अब अमेरिका दबाव बना रहा है कि भारत रूस के साथ आधुनिक S-400सिस्टम्स खरीदने के 5 अरब डॉलर की डील को रद्द कर दे। उसने कड़ा कदम उठाने की चेतावनी भी दी है। फिलहाल भारत अपने हथियारों की खरीद को लेकर अमेरिका से छूट हासिल करने की कोशिश कर रहा है।खरीदा है, जिसकी डिलिवरी शुक्रवार से शुरू भी हो गई। कई तस्वीरें भी मीडिया में आईं हैं, जिसमें रूस के प्लेन से अंकारा में पहली खेप उतारी जाती दिखती है। भारत को S-400 की डिलिवरी 2020 के बाद होनी है। अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे से सुरक्षा देने के लिए सरकार के नियंत्रण वाले एक रूसी कर्जदाता को डिफेंस इंडस्ट्री को फाइनैंस करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह कर्जदाता भारतीय लेनदेन में भी अहम भूमिका निभाएगा।india, russia have agreed on new payment method to avoid risks by american threat
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